पटना: बिहार में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। राज्य की प्रमुख नदियों और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के ताजा आंकड़े स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत दिखा रहे हैं। जल संसाधन विभाग, बिहार की ओर से 3 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे तक जारी बैराज डिस्चार्ज रिपोर्ट के अनुसार सोन और कोसी बैराज से पानी का बहाव बढ़ रहा है, जबकि वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से डिस्चार्ज में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में तीन प्रमुख बैराजों—सोन बैराज इंद्रपुरी, कोसी बैराज बीरपुर और गंडक बैराज वाल्मीकिनगर—से पानी के डिस्चार्ज का आंकड़ा जारी किया गया है। रिपोर्ट में पिछले दो घंटे के आंकड़ों के आधार पर पानी के बढ़ने या घटने की स्थिति यानी ट्रेंड भी बताया गया है।
सोन बैराज से पानी का बहाव बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक सोन बैराज इंद्रपुरी से 2 सितंबर की तुलना में 3 सितंबर को पानी के बहाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दोपहर 11 बजे यहां से 4,73,897 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। दोपहर 12 बजे यह घटकर 4,44,915 क्यूसेक हो गया।इसके बाद दोपहर 1 बजे डिस्चार्ज बढ़कर 4,51,431 क्यूसेक और दोपहर 2 बजे 4,52,884 क्यूसेक पहुंच गया। विभाग ने सोन बैराज के पानी के बहाव का ट्रेंड ‘Rising’ यानी बढ़ता हुआ बताया है।सोन बैराज की डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 14.58 लाख क्यूसेक बताई गई है। हालांकि मौजूदा डिस्चार्ज डिजाइन क्षमता से काफी कम है, लेकिन पानी के बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए सोन नदी के आसपास के क्षेत्रों में निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कोसी बैराज से भी बढ़ा डिस्चार्ज
बिहार की बाढ़ की स्थिति में कोसी नदी का जलस्तर हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार कोसी बैराज, बीरपुर से भी पानी के डिस्चार्ज में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दोपहर 11 बजे और 12 बजे कोसी बैराज से 2,04,850 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। दोपहर 1 बजे भी यह आंकड़ा 2,04,850 क्यूसेक रहा, लेकिन दोपहर 2 बजे डिस्चार्ज बढ़कर 2,11,115 क्यूसेक हो गया। रिपोर्ट में कोसी बैराज का ट्रेंड भी ‘Rising’ दर्ज किया गया है। इसकी डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 9.50 लाख क्यूसेक है। पानी के बहाव में वृद्धि को देखते हुए कोसी से जुड़े निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता जरूरी है, क्योंकि नदी के जलस्तर और बैराज डिस्चार्ज में बदलाव का असर निचले क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।
गंडक नदी से मिली थोड़ी राहत
वहीं, गंडक बैराज वाल्मीकिनगर से पानी के डिस्चार्ज में फिलहाल गिरावट का संकेत मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक सुबह 11 बजे गंडक बैराज से 1,63,400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था। दोपहर 12 बजे भी यह आंकड़ा 1,63,400 क्यूसेक रहा।दोपहर 1 बजे डिस्चार्ज अचानक बढ़कर 1,71,400 क्यूसेक पहुंचा, लेकिन 2 बजे इसमें कमी आई और यह 1,67,400 क्यूसेक दर्ज किया गया। विभाग ने गंडक बैराज का ट्रेंड ‘Falling’ यानी गिरता हुआ बताया है। गंडक बैराज की डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 8.50 लाख क्यूसेक है। हालांकि वर्तमान डिस्चार्ज इससे काफी नीचे है, लेकिन नदी के बहाव में घंटे-दर-घंटे होने वाले बदलाव के कारण प्रभावित जिलों में निगरानी जारी रखना जरूरी है।
तीनों बैराजों की तस्वीर क्या कहती है?
दोपहर 2 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो सोन और कोसी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ने का ट्रेंड चिंता बढ़ाने वाला है, जबकि गंडक में फिलहाल गिरावट राहत का संकेत दे रही है। खास तौर पर कोसी बैराज से 2.11 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज दर्ज होना उत्तर बिहार के निचले इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है।
बाढ़ की स्थिति केवल बैराज से छोड़े गए पानी पर निर्भर नहीं करती। नदी का जलस्तर, स्थानीय बारिश, नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा, तटबंधों की स्थिति और निचले इलाकों में पानी के फैलाव जैसे कई कारक मिलकर स्थिति को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी एक आंकड़े के आधार पर बाढ़ की स्थिति को सामान्य या गंभीर घोषित करना उचित नहीं होगा।
प्रशासन की निगरानी जरूरी
बिहार में पहले से ही कई इलाकों में नदियों के बढ़े जलस्तर और बाढ़ जैसी स्थिति की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में बदलाव पर प्रशासन की नजर बनी रहना बेहद जरूरी है। तटबंधों, स्परों और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव दलों को सक्रिय रखने की आवश्यकता है।
फिलहाल 3 सितंबर की दोपहर 2 बजे तक की तस्वीर में सोन और कोसी बैराज का ट्रेंड बढ़ता हुआ, जबकि गंडक बैराज का ट्रेंड गिरता हुआ है। आने वाले घंटों में पानी के डिस्चार्ज में होने वाला बदलाव बिहार के कई नदी किनारे वाले इलाकों के लिए अहम साबित हो सकता है। इसलिए स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी पर नजर रखने और नदी तथा तटबंध के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी जाती है।





