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बिहार के बाढ़ पीड़ित मछुआरों को बड़ी राहत, डूबी नाव से फटे जाल तक का मुआवजा देगी सरकार

Bihar flood relief News: बिहार में बाढ़ से प्रभावित मछुआरों और मत्स्य किसानों के लिए सरकार ने आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है। नाव और जाल के नुकसान के साथ-साथ तालाब, मत्स्य फार्म और मछली चारे के लिए भी मदद मिलेगी...

बिहार के बाढ़ पीड़ित मछुआरों को बड़ी राहत, डूबी नाव से फटे जाल तक का मुआवजा देगी सरकार
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar flood relief News: बिहार में बाढ़ से प्रभावित मछुआरों और मत्स्य किसानों के लिए सरकार ने आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है. बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त या गुम हुई नाव और जाल की मरम्मत या उन्हें दोबारा खरीदने के लिए पात्र लाभार्थियों को सहायता राशि दी जाएगी. इसके साथ ही मछली के चारे और बाढ़ से प्रभावित मत्स्य फार्म एवं तालाबों के पुनरुद्धार के लिए भी आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है.


सरकार की ओर से दी जाने वाली इस सहायता का उद्देश्य बाढ़ के कारण प्रभावित हुई मत्स्य पालकों की आजीविका को दोबारा शुरू करने में मदद करना है. निर्धारित मानदंडों के अनुसार आंशिक और पूरी तरह क्षतिग्रस्त नाव एवं जाल के लिए अलग-अलग राशि तय की गई है.


आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त नाव की मरम्मत के लिए 6 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी. वहीं, पूरी तरह क्षतिग्रस्त नाव को बदलने के लिए 15 हजार रुपये दिए जाएंगे. इसी तरह आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त जाल की मरम्मत के लिए 3 हजार रुपये और पूरी तरह क्षतिग्रस्त जाल को बदलने के लिए 4 हजार रुपये की सहायता निर्धारित की गई है.


यह सहायता बाढ़ में क्षतिग्रस्त या गुम हुई गैर-यंत्रीकृत नाव और जाल के लिए दी जाएगी. इसका लाभ उन्हीं पात्र लाभार्थियों को मिलेगा, जिन्हें बाढ़ से हुए नुकसान के लिए किसी अन्य सरकारी योजना के तहत सब्सिडी या आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है.


छोटे और सीमांत मत्स्य किसानों के लिए भी सरकार ने अलग प्रावधान किया है. बाढ़ के बाद मछली पालन को दोबारा शुरू करने के लिए मछली के चारे की खरीद पर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से इनपुट सब्सिडी दी जाएगी.


बाढ़ प्रभावित तालाब और मत्स्य फार्म के पुनरुद्धार के लिए भी सहायता

बाढ़ के कारण प्रभावित हुए तालाबों और मत्स्य फार्मों को दोबारा उपयोग योग्य बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी. तालाब से गाद निकालने, उसके पुनरुद्धार और मछली फार्मों की मरम्मत के लिए 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता निर्धारित की गई है.


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी लाभार्थी को बाढ़ से हुए नुकसान के लिए पहले ही किसी दूसरी सरकारी योजना के तहत सहायता या सब्सिडी मिल चुकी है, तो उसे इस प्रावधान के तहत दोबारा लाभ नहीं मिलेगा. हालांकि, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की योजना के तहत मिलने वाली एकमुश्त सब्सिडी को इस प्रावधान से अलग रखा गया है.


कैसे मिलेगी सहायता

बाढ़ से प्रभावित मछुआरे और मत्स्य किसान सहायता से जुड़ी जानकारी के लिए अपने जिले के जिला मत्स्य पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और मत्स्य निदेशालय, बिहार की वेबसाइट पर भी योजना से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई है.