Patna Book Fair 2026 : अगर आपको किताबों की खुशबू, कविताओं की दुनिया, कहानियों का रोमांच और साहित्य से जुड़ी चर्चाएं पसंद हैं, तो दिसंबर में पटना का गांधी मैदान आपका इंतजार कर रहा है। यहां 4 से 15 दिसंबर 2026 तक 42वां पटना पुस्तक मेला आयोजित होने जा रहा है। सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (CRD) की ओर से आयोजित इस मेले में इस बार किताबों के साथ सिनेमा, कला, कविता, खानपान, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े 350 से अधिक कार्यक्रम होंगे।
पटना पुस्तक मेला देश के प्रमुख पुस्तक मेलों में अपनी अलग पहचान रखता है। इस बार भी आयोजकों ने इसे केवल किताबों की खरीद-बिक्री तक सीमित रखने के बजाय ऐसा मंच बनाने की तैयारी की है, जहां पाठकों को साहित्य से लेकर सिनेमा और युवाओं को रोजगार से लेकर अपनी प्रतिभा दिखाने तक के कई मौके मिलेंगे।
मेले के अध्यक्ष और चर्चित साहित्यकार रत्नेश्वर के मुताबिक, इस साल का पुस्तक मेला बिहार गीत के रचयिता और लोककवि सत्यनारायण को समर्पित किया जाएगा। ऐसे में बिहार की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत भी इस आयोजन के केंद्र में रहेगी।
200 स्टॉल पर मिलेगी किताबों की बड़ी दुनिया
गांधी मैदान में इस बार करीब 200 स्टॉल लगाए जाएंगे। देशभर के प्रमुख प्रकाशक यहां अपनी किताबों के साथ पहुंचेंगे। इनमें प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, ज्ञानपीठ, उपकार प्रकाशन, हिन्द युग्म, साहित्य अकादमी, एनसीपीयूएल और रेख्ता फाउंडेशन समेत कई बड़े नाम शामिल हैं।
साहित्य, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, बाल साहित्य और अलग-अलग विषयों से जुड़ी किताबें एक ही जगह उपलब्ध होंगी। यानी किताबों की तलाश में अलग-अलग दुकानों के चक्कर लगाने वाले पाठकों के लिए गांधी मैदान इन दिनों में किताबों का बड़ा ठिकाना बनने वाला है।
युवाओं के लिए 'चिट्ठियां' से 'यूथ पोडियम' तक
इस बार युवाओं को पुस्तक मेले से जोड़ने के लिए कई खास कार्यक्रम रखे गए हैं। 'चिट्ठियां' कार्यक्रम में ऐसी चिट्ठियों को पढ़ा जाएगा, जिन्हें लोगों ने कभी लिखा तो था, लेकिन समय बीतने के बावजूद वे उनकी यादों से बाहर नहीं निकल सकीं। डॉ. विमलेन्दु चर्चित चिट्ठियों को सुनाएंगे, वहीं शहर के युवा भी अपनी लिखी या अपने जीवन पर गहरा असर डालने वाली चिट्ठियों को साझा कर सकेंगे।
इसके अलावा 'यूथ पोडियम' में युवा राजनीति, कला, साहित्य, संस्कृति और बदलते सामाजिक माहौल जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखेंगे। डॉ. वरुण के संयोजन में होने वाले इस कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
कविता-कहानी लिखने वालों को मिलेगा मंच
कविता, कहानी या व्यंग्य लिखने वाले युवाओं के लिए 'शब्दांकुर' खास आकर्षण रहेगा। उत्कर्ष आनंद के संयोजन में होने वाले इस कार्यक्रम में युवा रचनाकार अपनी रचनाएं सीधे दर्शकों के सामने पेश करेंगे। चयनित रचनाकार को 'शब्दांकुर पुरस्कार' भी दिया जाएगा। इसके लिए निर्णायक मंडल के साथ दर्शकों की राय को भी महत्व दिया जाएगा। इसके अलावा हर दिन 'काव्यकथा' में देश के चर्चित कवि और कथाकार अपनी रचनाएं सुनाएंगे। मेले में भव्य कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।
किताबों के साथ चाय और बिहार के स्वाद का मजा
पुस्तक मेले में इस बार साहित्य के साथ स्वाद का भी तड़का लगेगा। 'स्वाद विहार' कार्यक्रम में बिहार के पारंपरिक व्यंजनों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों के चुनिंदा पकवान भी उपलब्ध होंगे। मेले में विशेष फूड लाउंज बनाया जाएगा, जहां लोग चाय की चुस्कियों के साथ अपनी पसंदीदा किताब पढ़ सकेंगे। यानी किताब हाथ में और चाय का प्याला सामने—पुस्तक प्रेमियों के लिए यह अनुभव मेले की खास याद बन सकता है।
70 स्कूलों के 5 हजार बच्चे दिखाएंगे हुनर
बच्चों और स्कूली विद्यार्थियों के लिए भी मेले में बड़े स्तर पर आयोजन होंगे। 'हुनर' कार्यक्रम में कहानीकार, माइम शो, वेस्ट क्राफ्ट, सेल्फी चैलेंज, कलर लस्ट, ब्रेन ड्रेन और जैम गेम जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। आयोजकों के मुताबिक, 70 से अधिक स्कूलों के करीब पांच हजार बच्चों के इसमें शामिल होने की संभावना है। 'स्कूल उत्सव' में विद्यार्थी गीत, संगीत और नृत्य के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
गांधी मैदान में बनेगा अपना सिनेमा हॉल
इस बार पुस्तक मेले में किताबों के साथ फिल्मों का भी अलग संसार देखने को मिलेगा। 'सिनेमा-उनेमा' फिल्म फेस्टिवल के लिए विशेष सिनेमा हॉल तैयार किया जाएगा। यहां हर दिन फीचर फिल्म, शॉर्ट फिल्म और डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी।फिल्म खत्म होने के बाद उससे जुड़े विषयों पर संवाद भी होगा। देशभर से सिनेमा जगत के कलाकार और विशेषज्ञ इसमें शामिल होंगे। दर्शकों को उनके साथ सीधे बातचीत का अवसर मिलेगा। सिनेमा क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
डॉक्टरों से सीधे पूछ सकेंगे स्वास्थ्य से जुड़े सवाल
पुस्तक मेले का 'स्वास्थ्य संवाद' भी लोगों के लिए उपयोगी कार्यक्रम होगा। पिछले साल मिली प्रतिक्रिया के बाद इसे इस बार भी आयोजित किया जा रहा है। डॉ. विकास शंकर के संयोजन में देश के प्रमुख डॉक्टर स्वास्थ्य से जुड़े अलग-अलग विषयों पर जानकारी देंगे। खास बात यह होगी कि आम लोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे अपने सवाल पूछ सकेंगे।
कला दीर्घा में दिखेगी बिहार की प्रतिभा
किताबों के बीच कला की दुनिया भी अपनी जगह बनाएगी। मेले में विशेष 'कला दीर्घा' बनाई जाएगी, जहां बिहार के युवा, लोक और वरिष्ठ कलाकारों के साथ पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। कला से जुड़े विषयों पर हर दिन चर्चा और गोष्ठियां भी होंगी। वहीं 'नुक्कड़ के रंग' कार्यक्रम में पटना के प्रमुख कॉलेजों के विद्यार्थी नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक मुद्दों को मंच पर प्रस्तुत करेंगे।
प्रतियोगी छात्रों और नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए भी खास मौका
पुस्तक मेले में पढ़ाई और रोजगार से जुड़े कार्यक्रम भी होंगे। 'ज्ञान-रोजगार' और 'कोचिंग मास्टर' के जरिए राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण एवं कोचिंग संस्थान युवाओं से संवाद करेंगे। इसके अलावा 'जनसंवाद' में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ और विद्वान लोगों से बातचीत करेंगे। 'युवा स्वर', 'नई किताब', 'बिहार संवादी' जैसे कार्यक्रम भी मेले की रौनक बढ़ाएंगे।
देशभर के लेखक-कवि जुटेंगे पटना में
इस बार पटना पुस्तक मेले में देश के चर्चित पत्रकार, लेखक, कवि, कथाकार और साहित्यकारों के जुटने की उम्मीद है। हर्ष वर्धन त्रिपाठी, अनंत विजय, पूनम सिंह, डॉ. विनय कुमार, किरण घई, जय प्रकाश पांडेय, मदन कश्यप, निवेदिता झा और संजय कुंदन समेत कई नामचीन हस्तियां कार्यक्रमों में शामिल होंगी। कविता के मंच पर अनिल विभाकर, चंदन सिंह, विनय सौरव, सर्वेश तिवारी, कुमार मुकुल, शहंशाह आलम, खुर्शीद अकबर, प्रेम किरण, श्वेता गजल और आराधना प्रसाद समेत कई कवि अपनी रचनाएं सुनाएंगे। वहीं भावना शेखर, प्रभात प्रणीत, रीता सिंह, नीलिमा सिंह, उषा ओझा और किरण सिंह समेत कई कथाकार भी साहित्य प्रेमियों से रूबरू होंगे।
कुल मिलाकर 4 से 15 दिसंबर तक गांधी मैदान में लगने वाला 42वां पटना पुस्तक मेला इस बार किताबों की खरीदारी से कहीं आगे निकलता नजर आएगा। यहां किसी को पसंदीदा किताब मिलेगी तो किसी को कविता का मंच, किसी को फिल्म देखने का मौका मिलेगा तो किसी को रोजगार और करियर से जुड़ी जानकारी। बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी, युवाओं के लिए संवाद होगा और खाने के शौकीनों के लिए बिहार के स्वाद का इंतजाम। यानी दिसंबर में गांधी मैदान सिर्फ किताबों का बाजार नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, कला, सिनेमा, शिक्षा, रोजगार और बिहार के स्वाद का एक बड़ा उत्सव बनने जा रहा है।





