1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 25 Feb 2026 02:33:39 PM IST
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Bihar BPSC TRE-1 : बिहार में शिक्षा जगत में फर्जीवाड़े का मामला एक बार फिर उजागर हुआ है। राज्य के लाखों युवा चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (BPSC TRE-4 Notification) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बीपीएससी टीआरई-1 में फर्जी तरीके से शिक्षक बनने का मामला सामने आने से सरकार और शिक्षा विभाग की सतर्कता बढ़ गई है।
पूर्णिया जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, विजय कुमार नामक व्यक्ति को कंप्यूटर साइंस शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई कराई, लेकिन जांच में पता चला कि उन्होंने फर्जी तरीके से यह नौकरी हासिल की थी। विजय कुमार ने वर्ष 2019 में राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) दिया था, लेकिन उनके पास मास्टर्स डिग्री नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने STET पेपर-2 के आधार पर बीपीएससी टीआरई-1 परीक्षा दी और अगस्त 2023 में आयोजित परीक्षा के परिणाम के बाद जनवरी 2024 में उन्हें नियुक्ति मिल गई।
विजय कुमार की नियुक्ति उत्क्त्क्रमित उच्च विद्यालय चपय गंगेली, के० नगर, पूर्णिया में हुई थी। विभागीय जांच में यह स्पष्ट हो गया कि उनके पास शिक्षक बनने की पात्रता नहीं थी। 9 अक्टूबर 2025 को उनसे पूछताछ की गई और जांच में सभी आरोप सही पाए गए। इस कार्रवाई के तहत विजय कुमार को सरकारी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है और वेतन वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पूर्णिया जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बिहार राज्य विद्यालय शिक्षक (नियुक्ति, स्थानांतरण, अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं सेवा शर्तें) नियमावली, 2023 के नियम 18 के तहत ऐसे फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करने के साथ उनका पूरा वेतन वसूलने का प्रावधान है। नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी फर्जी या गलत प्रमाण-पत्र पाए जाने पर नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी और वेतन के साथ मिलने वाले सभी भत्ते भी वापस लिए जाएंगे।
यह पहला मामला नहीं है जब बिहार में फर्जी तरीके से शिक्षकों की भर्ती हुई और फिर उन पर कार्रवाई हुई। पिछले वर्षों की रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार ने अब तक 3000 से अधिक फर्जी शिक्षकों के मामले सामने आए हैं। इन फर्जी नियुक्तियों के कारण राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। इसलिए सरकार ने इन सभी मामलों से 1400 करोड़ रुपये ब्याज सहित वसूलने की योजना बनाई है।
साथ ही, वर्तमान में लगभग 12 हजार शिक्षकों के सर्टिफिकेट संदिग्ध पाए गए हैं और उनकी जांच अभी भी जारी है। बिहार सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि सभी फर्जी प्रमाण-पत्रों की त्वरित जांच की जाए। सरकार का कहना है कि फर्जी तरीके से शिक्षक बनने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा।
वर्ष 2023 में लागू बिहार राज्य विद्यालय शिक्षक नियमावली ने इस दिशा में कड़े कदम उठाए हैं। नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी शिक्षक की नियुक्ति में धोखाधड़ी पाए जाने पर न केवल नौकरी रद्द की जाएगी, बल्कि उसे मिले वेतन और भत्ते भी वापस लेने होंगे। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और योग्य शिक्षक को ही मौका देना है।
शिक्षकों की गुणवत्ता पर ध्यान देना बिहार सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। फर्जी शिक्षक न केवल छात्रों के शैक्षिक स्तर को प्रभावित करते हैं, बल्कि शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई से युवाओं में भी संदेश जाता है कि केवल योग्य और पात्र व्यक्ति ही शिक्षक पद पर नियुक्त हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में टीआरई-1, टीआरई-2 और आगामी चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (BPSC TRE-4 Notification) को लेकर युवाओं में उत्सुकता है, लेकिन फर्जीवाड़े की घटनाओं ने शिक्षा प्रणाली की गंभीरता को उजागर किया है। इसलिए भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ऑनलाइन सत्यापन, दस्तावेज़ जांच और सख्त निगरानी प्रणाली लागू कर रही है।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शून्य सहनशीलता नीति अपनाए हुए है। विजय कुमार के मामले में बर्खास्तगी और वेतन वसूली की प्रक्रिया एक उदाहरण के रूप में सामने आई है, जो सभी संभावित फर्जी उम्मीदवारों के लिए चेतावनी का काम करेगी।
बिहार सरकार का कहना है कि शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी इस दिशा में पूरी तरह सजग हैं और राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। फर्जी शिक्षक मुद्दों पर कड़ी कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहेगा, ताकि राज्य के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार में शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। भविष्य में भी फर्जी प्रमाण-पत्र और गलत तरीकों से शिक्षक बनने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।