Bihar News: बिहार के हर गांव में बनेगी दुग्ध उत्पादन समिति, हर पंचायत में खुलेगा सुधा बिक्री केंद्र; सरकार का बड़ा एलान

Bihar News: बिहार के हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति और हर पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र खोले जाएंगे। बजट 2026-27 में डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Wed, 04 Feb 2026 07:37:17 AM IST

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प्रतिकात्मक - फ़ोटो AI

Bihar News: आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय-3 के तहत राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन किया जाएगा और हर पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र खोले जाएंगे। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को विधानमंडल में बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि चतुर्थ कृषि रोडमैप के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र पर विशेष जोर दिया जाएगा।


वित्त मंत्री ने कहा कि इसी योजना के तहत हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही मधेपुरा में 50 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाला शीतक (कोल्ड स्टोरेज) केंद्र स्थापित किया जाएगा।


मत्स्य पालन क्षेत्र की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में मत्स्य की उपलब्धता 60 प्रतिशत आबादी के आधार पर 12.21 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है। इस वर्ष 2044 मिलियन मत्स्य बीज का वार्षिक उत्पादन हुआ है। इसके चलते बिहार मत्स्य उत्पादन के मामले में देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।


पशुधन सेवाओं को मजबूत करने के लिए पशु अस्पतालों में 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यहां डिजिटल एक्स-रे की व्यवस्था होगी, वहीं पशुओं की गर्भ जांच और रोगों के त्वरित व सही निदान के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनें भी स्थापित की जाएंगी। सीमेन और भ्रूण के उत्पादन, भंडारण, वितरण और कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के लिए बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम 2025 लागू कर दिया गया है।


राज्य में बकरी की उन्नत नस्ल को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। बकरी विकास योजना के तहत बकरी प्रजनन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही बकरी सीमेन स्टेशन और बकरी फेडरेशन का गठन किया जाएगा। वहीं सूकर विकास योजना के अंतर्गत सूकर प्रजनन, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जा रही है।


डेयरी योजनाओं के माध्यम से गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। समग्र गव्य विकास योजना के तहत लोन सह अनुदान और स्वलागत पर डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देकर लोगों को सशक्त बनाया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे।