1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Feb 04, 2026, 7:20:54 AM
प्रतिकात्मक - फ़ोटो AI
Bihar News: बिहार के विभिन्न जिलों में स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए गांवों में बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाट विकसित की जाएंगी। इसे राज्य सरकार के सात निश्चय-3 की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और लोगों की आय को दोगुना करना है।
इसके तहत सरकार एक ओर रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों के लिए बेहतर बाजार की व्यवस्था करेगी। बिहार विधानसभा में मंगलवार को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा प्रस्तुत बजट भाषण पुस्तिका में इसका विस्तार से उल्लेख किया गया है। बजट में कहा गया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण हाट विकसित की जाएंगी।
इसके लिए प्रखंड स्तर पर कृषि विभाग की जमीन भी चिन्हित की गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक राशि का प्रावधान राज्य सरकार ने बजट में कर दिया है। यही कारण है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण विकास विभाग के बजट में साढ़े सात हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बजट आकार के लिहाज से यह विभाग अब शिक्षा के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा विभाग बन गया है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह चौथे स्थान पर था।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास विभाग का बजट 16 हजार 93 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 23 हजार 701 करोड़ रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अगले वित्तीय वर्ष में महिलाओं को दो-दो लाख रुपये तक सहायता दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत जीविका से जुड़ी 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये की सहायता पहले ही दी जा चुकी है। जिन महिलाओं का व्यवसाय बेहतर चलेगा, उन्हें आगे दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त मदद सरकार देगी।
इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2026-27 में पांच लाख नए या छूटे हुए परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 1 लाख 29 हजार स्वयं सहायता समूहों को बैंकों द्वारा 7,052 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया जा चुका है। वित्त मंत्री ने बताया कि महिलाओं को उद्योग लगाने के लिए दिया गया 10-10 हजार रुपये का अनुदान वापस नहीं लिया जाएगा, जबकि आगे उद्योग विस्तार के लिए दो-दो लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
राज्य में ग्रामीण हाट के विकास के लिए कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। कृषि विभाग जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के विपणन के लिए इन हाटों को विकसित करेगा। ग्रामीण कृषि हाट के विकास को गति देने के लिए बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल कतरनी चावल, मर्चा धान, जर्दालु आम, शाही लीची, मगही पान, मिथिला मखाना और हाजीपुर का चीनिया केला जैसे कई उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त है।
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