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बिहार में बदलने वाले हैं बिल्डिंग के नियम... कम जोखिम वाले भवनों के लिए नई सुविधा, जानिए क्या है पूरा बदलाव

Bihar building rules 2026: बिहार में भवन निर्माण से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए Building Bylaws 2026 का प्रारूप तैयार किया गया है। प्रस्तावित नियमों में कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन और मध्यम जोखिम वाले भवनों के लिए थर्ड पार्टी...

बिहार में बदलने वाले हैं बिल्डिंग के नियम... कम जोखिम वाले भवनों के लिए नई सुविधा, जानिए क्या है पूरा बदलाव
Ramakant kumar
5 मिनट

Bihar building rules 2026: बिहार में भवन निर्माण और कारोबार से जुड़े नियमों को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने बिहार बिल्डिंग बायलॉज 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है. नए प्रावधानों के तहत कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन की सुविधा देने की तैयारी है, जबकि मध्यम जोखिम वाले भवनों के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.


ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डीरेगुलेशन 1.0 एवं 2.0 के तहत किए जा रहे सुधारों की प्रगति को लेकर बुधवार को पुराने सचिवालय के सभागार में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक और बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की.


बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच विभिन्न प्राथमिक क्षेत्रों में हुए समझौतों और उनके क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई. इस दौरान भवन निर्माण, उद्योग, भूमि, पर्यावरण, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन से जुड़े नियमों में किए जा रहे बदलावों की जानकारी अधिकारियों ने साझा की.


कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन

डीरेगुलेशन 1.0 और 2.0 के तहत भवन निर्माण की मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए बिहार बिल्डिंग बायलॉज 2026 का प्रारूप तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य भवन निर्माण की अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल करना और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया को कम करना है.


प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है. वहीं मध्यम जोखिम वाले भवनों के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण की व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा व्यावसायिक भूखंडों के उपयोग को बेहतर बनाने और मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है.


ईओडीबी विधेयक को मिल चुकी है मंजूरी

राज्य में कारोबार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 को भी महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है. बिहार विधानमंडल ने 23 जुलाई 2026 को इस विधेयक को मंजूरी दे दी है.


इस व्यवस्था के तहत उद्योगों को दोहरे लाइसेंस से राहत देने, एमएसएमई को स्व-घोषणा के आधार पर मंजूरी देने और निरीक्षण प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रावधान किया गया है. सरकार का उद्देश्य कारोबार शुरू करने और उसे संचालित करने में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को कम करना है.


2000 से ज्यादा सरकारी दस्तावेज ऑनलाइन

बिहार सरकार ने अपने नियमों, अधिनियमों और सरकारी आदेशों को एक जगह उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीकृत डिजिटल रिपॉजिटरी पोर्टल भी शुरू किया है. बिहार डॉट जीओवी डॉट इन पर 19 जून 2026 से यह व्यवस्था लाइव है. अब तक इस पोर्टल पर 2000 से अधिक सरकारी दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं.


आरटीपीएस में ऑटो-अपील की सुविधा

लोक सेवाओं के अधिकार यानी आरटीपीएस के तहत सेवाओं को समयबद्ध बनाने के लिए ऑटो-अपील प्रणाली भी लागू की गई है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद 23 जून 2026 से यह प्रणाली लाइव है. इसके जरिए निर्धारित समय सीमा में सेवा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अपील की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने की व्यवस्था की गई है.


भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया में राहत

बैठक में भूमि और पर्यावरण से जुड़े सुधारों पर भी चर्चा हुई. किसानों और भूमि मालिकों को राहत देने के उद्देश्य से भूमि उपयोग परिवर्तन यानी सीएलयू की आवश्यकता को समाप्त करने पर सहमति बनी है. इसके साथ ही बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज करने और निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम भूमि की बाध्यता को खत्म करने जैसे सुधारों पर भी काम किया जा रहा है.


स्वास्थ्य क्षेत्र में लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य लाइसेंसिंग पोर्टल विकसित करने का निर्णय लिया गया है. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जल्द ही निविदा जारी की जाएगी.


पर्यटन क्षेत्र में भी नई मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन नीति 2026 के तहत नियमों को सरल बनाया गया है. सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और लोगों को होमस्टे के जरिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है.


बैठक में उद्योग, नगर विकास, राजस्व एवं भूमि सुधार, गृह, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में लागू किए जा रहे सुधारों और उनकी प्रगति की जानकारी साझा की.