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Bihar land acquisition : बिहार में रैयतों के लिए खुशखबरी! अब इस रेट से मिलेगा अधिग्रहित जमीन का मुआवजा; जानिए क्या है पूरी खबर

बिहार सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथ परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण मुआवजा अब खतियान की किस्म के बजाय वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर तय करने का फैसला किया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

Bihar land acquisition : बिहार में रैयतों के लिए खुशखबरी! अब इस रेट से मिलेगा अधिग्रहित जमीन का मुआवजा; जानिए क्या है पूरी खबर
Tejpratap
Tejpratap
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राष्ट्रीय उच्च पथ निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब अधिग्रहित भूमि का मुआवजा खतियान में दर्ज भूमि किस्म के बजाय वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाएगा। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने रविवार को सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।


पुरानी प्रणाली थी विवादों की जड़

अब तक भूमि का वर्गीकरण 100 वर्ष पुराने खतियान में दर्ज किस्म के आधार पर किया जाता रहा है। इन खतियानों में दर्ज भूमि की उपयोगिता और वर्तमान समय में उसकी वास्तविक स्थिति में अक्सर बड़ा अंतर पाया जाता है। उदाहरण के लिए, कई जगहों पर खतियान में दर्ज "बांझ जमीन" आज की तारीख में अत्यधिक उपजाऊ या व्यावसायिक मूल्य वाली साबित होती है।


इसी विसंगति के कारण अक्सर रैयतों की ओर से मुआवजे को लेकर आपत्तियां दर्ज होती थीं। इससे भूमि मालिक और राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण (NHAI) के बीच विवाद बढ़ जाते थे और परियोजनाओं में अनावश्यक देरी होती थी। ऐसे में अब महाधिवक्ता की राय आधार बनी है। सरकार ने इस विषय पर राज्य के महाधिवक्ता से विधिक राय ली। 


उन्होंने स्पष्ट कहा कि एनएच एक्ट, 1956 की धारा 3जी और भू-अर्जन अधिनियम, 2013 की धारा 26 से 30 इन सभी में भूमि मुआवजा तय करने के लिए खतियान में दर्ज किस्म पर निर्भर रहने की बाध्यता नहीं है। इसके बजाय जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य ही मुआवजे का मुख्य आधार होना चाहिए। इस राय के बाद सरकार ने पुराने भूमि वर्गीकरण प्रणाली पर आधारित मुआवजा तय करने की प्रक्रिया को बदल दिया है।


नए सिरे से तय होंगे जमीन के न्यूनतम मूल्य

राजस्व विभाग ने निबंधन विभाग से पहले ही अनुरोध किया था कि जमीन के नए न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किया जाए। इस निर्देश से यह सुनिश्चित होगा कि मुआवजा दरें बाजार के अनुरूप हों,जमीन मालिकों को उचित राशि मिले और अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर विवाद कम हों


क्या बदलेगा इस फैसले से?

1. रैयतों को मिलेगा न्यायसंगत मुआवजा

अब उन्हें कम मूल्य पर जमीन छोड़ी जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। वास्तविक बाजार दर पर मुआवजा मिलने से उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी।

2. अधिग्रहण में पारदर्शिता बढ़ेगी

इस नई व्यवस्था से जिलाधिकारियों और भूमि अधिग्रहण इकाइयों के बीच स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित होगी और मनमानी की गुंजाइश कम होगी।

3. निर्माण परियोजनाओं में तेजी आएगी

मुआवजे से संबंधित विवाद कम होने से सड़क निर्माण और राष्ट्रीय उच्च पथ परियोजनाओं में होने वाली देरी घटेगी।

4. निवेश और विकास कार्यों को मिलेगा प्रोत्साहन

NHAI और राज्य सरकार द्वारा संचालित परियोजनाएं समय पर पूर्ण हो सकेंगी, जिससे राज्य के बुनियादी ढांचे में तेजी से सुधार होगा।


बहरहाल, बिहार सरकार का यह कदम न केवल रैयतों के हित में है, बल्कि राज्य के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा तय होने से भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता आएगी, विवाद कम होंगे और राष्ट्रीय उच्च पथ परियोजनाओं की गति भी तेज होगी। यह निर्णय आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकता है।