Bihar Assembly : बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का शुक्रवार को पांचवां और अंतिम दिन है। सत्र के आखिरी दिन भी सदन के अंदर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज रहने के आसार हैं। पिछले चार दिनों तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। गुरुवार को मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में ही सवाल उठाते हुए पूछा था कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आखिर कहां हैं और क्या वे अस्वस्थ हैं। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्र के समापन दिवस पर तेजस्वी यादव सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं।
मानसून सत्र के अंतिम दिन विधानसभा की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी। इसके बाद पथ निर्माण विभाग की ओर से बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-2 भर्ती संशोधन नियमावली, 2026 तथा बिहार तकनीकी सेवा संशोधन नियमावली, 2026 की प्रतियां सदन के पटल पर रखी जाएंगी। इसके अलावा गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा होगी। सत्र के समापन अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति अपने समापन भाषण भी देंगे।
विधान परिषद में उठेंगे कई अहम जनहित के मुद्दे
विधान परिषद में भी आज कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। सदस्य महेश्वर सिंह समेत छह विधान पार्षद भोजपुर स्थित वीर कुंवर सिंह स्मारक एवं संग्रहालय की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगेंगे। वहीं सदस्य जीवन कुमार सरकारी विद्यालयों में कार्यरत विशिष्ट-नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए सम्मानजनक पेंशन व्यवस्था की मांग करेंगे। उनका कहना है कि जिन कर्मचारियों की सेवा अवधि 10 वर्ष से कम बची है, उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए।इसके अलावा सदस्य वंशीधर ब्रजवासी पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग करेंगे। सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम अनुपूरक व्यय-विवरणी पर भी सामान्य चर्चा प्रस्तावित है।
छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज का मुद्दा रहेगा गर्म
मानसून सत्र के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा छात्रों के आंदोलन और उस पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर हुई। गुरुवार को विपक्षी विधायक बैनर-पोस्टर लेकर विधानसभा परिसर पहुंचे और पोर्टिको में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने "भाजपा हटाओ, शिक्षा बचाओ", "छात्रों की है एक ही मांग, पारदर्शी परीक्षा और सम्मान" तथा "छात्रों पर पुलिस बर्बरता नहीं चलेगी" जैसे नारों के साथ सरकार को घेरा। विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी विधायक धरने पर बैठ गए और लगातार सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाते रहे।
सदन में भी हुआ जोरदार हंगामा
गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान भाजपा विधायक श्याम बाबू यादव ने आरोप लगाया कि डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन करने वाले छात्र नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के समर्थक और गुंडे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उन पर और उनके सुरक्षा कर्मियों पर हमला किया गया तथा उनकी जान को खतरा था। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और सदन में काफी देर तक हंगामा होता रहा।
कार्यस्थगन प्रस्ताव भी हुआ खारिज
विधान परिषद में गुरुवार को राजद नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी ने छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराने के लिए कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने मांग की थी कि अन्य सभी कार्य रोककर छात्रों के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराई जाए। हालांकि सभापति ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की समस्याओं से मुंह मोड़ने का आरोप लगाया।
समापन दिन पर सबकी नजर
मानसून सत्र के अंतिम दिन सरकार जहां अपनी विधायी कार्यवाही पूरी करने और समापन भाषण के साथ सत्र का समापन करना चाहती है, वहीं विपक्ष छात्र आंदोलन, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। साथ ही, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की संभावित मौजूदगी भी आज की कार्यवाही का सबसे बड़ा राजनीतिक आकर्षण मानी जा रही है। ऐसे में सदन के अंतिम दिन भी तीखी बहस, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के पूरे आसार बने हुए हैं।





