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Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच तेज, आईओ ने परिजनों से की पूछताछ; शाहाबाद डीआईजी करेंगे पर्यवेक्षण

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच तेज हो गई है। आईओ ने परिवार से पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि पूरे मामले की निगरानी शाहाबाद डीआईजी करेंगे। जानिए अब तक क्या-क्या हुआ।

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच तेज, आईओ ने परिजनों से की पूछताछ; शाहाबाद डीआईजी करेंगे पर्यवेक्षण
Tejpratap
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Bihar News :  भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। मामले के अनुसंधानकर्ता (आईओ) पुलिस इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने आधिकारिक रूप से जांच शुरू करते हुए मृतक के परिवार से पूछताछ की है। उन्होंने गांव पहुंचकर भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी, मां आशा देवी और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज किए। पुलिस अब घटनाक्रम के हर पहलू की गहन जांच में जुट गई है।


इस चर्चित एनकाउंटर की निगरानी शाहाबाद रेंज के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश करेंगे। पुलिस मुख्यालय ने उन्हें मामले के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।


जांच के दौरान तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, एसटीएफ के जवान अक्षय और घटनास्थल से बरामद देसी पिस्तौल को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। बरामद हथियार और अन्य साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाएगी, ताकि मुठभेड़ की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।


गौरतलब है कि 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा के तहत पुलिस ने गोली चलाई। इसी कार्रवाई में उसकी मौत हुई।


हालांकि, मृतक के परिजनों ने पुलिस की इस कहानी पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी ने गोली लगने से पहले ही अपना हथियार फेंक दिया था और इसके बावजूद उस पर गोली चलाई गई। परिजनों का यह भी कहना है कि घटना से जुड़े कुछ वीडियो इस दावे की पुष्टि करते हैं और उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत तिवारी के शरीर में पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया। घटना को लेकर अब तक तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें दो केस पुलिस की ओर से दर्ज किए गए हैं, जबकि तीसरी प्राथमिकी मृतक की मां आशा देवी ने दर्ज कराई है।


आशा देवी ने अपनी शिकायत में तत्कालीन डीएसपी, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।


इस संवेदनशील मामले की जांच केवल पुलिस स्तर पर ही नहीं हो रही है, बल्कि न्यायिक जांच भी समानांतर रूप से जारी है। पटना हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग भी पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रहा है। आयोग पुलिस कार्रवाई, उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।


भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार की चर्चित घटनाओं में शामिल हो चुका है। ऐसे में पुलिस जांच और न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्य यह तय करेंगे कि मुठभेड़ पुलिस के दावे के अनुरूप थी या फिर परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।