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Bihar Politics : बिहार कैबिनेट पर बड़ा खुलासा! 48% मंत्रियों पर क्रिमिनल केस और 90% करोड़पति… ADR रिपोर्ट ने मचाया सियासी बवाल

ADR और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिहार मंत्रिमंडल के लगभग 48% मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 90% मंत्री करोड़पति हैं। रिपोर्ट में संपत्ति, शिक्षा और महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी अहम खुलासे किए गए हैं।

Bihar Politics : बिहार कैबिनेट पर बड़ा खुलासा! 48% मंत्रियों पर क्रिमिनल केस और 90% करोड़पति… ADR रिपोर्ट ने मचाया सियासी बवाल
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Politics : बिहार की राजनीति को लेकर एक बार फिर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच की ताज़ा रिपोर्ट ने बड़ा राजनीतिक बहस का मुद्दा खड़ा कर दिया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नई कैबिनेट के लगभग आधे मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं। रिपोर्ट में मंत्रियों की संपत्ति, आपराधिक पृष्ठभूमि, शिक्षा और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई है।


रिपोर्ट के अनुसार, बिहार मंत्रिमंडल के हालिया पुनर्गठन के बाद शामिल किए गए मंत्रियों के स्व-घोषित शपथ पत्रों का विश्लेषण किया गया। इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कुल 35 में से 31 मंत्रियों के दस्तावेजों को शामिल किया गया। यह शपथ पत्र आगामी 2025 विधानसभा और विधान परिषद चुनावों से पहले दाखिल किए गए थे।


विश्लेषण में सामने आया कि 31 मंत्रियों में से 15 मंत्री यानी लगभग 48 प्रतिशत ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें से नौ मंत्री (लगभग 29 प्रतिशत) गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मंत्रियों पर ऐसे आरोप भी हैं जो गंभीर श्रेणी में आते हैं, हालांकि यह सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।


रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दो मंत्रियों—जदयू के अशोक चौधरी और भाजपा के प्रमोद कुमार—को शपथ पत्र देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वे विधान परिषद के मनोनीत सदस्य हैं। इसके अलावा आरएलएम के दीपक प्रकाश और जदयू के निशांत कुमार का विवरण भी इस विश्लेषण में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वे वर्तमान में बिहार विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।


संपत्ति के आंकड़ों ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण किए गए 31 मंत्रियों में से 28 मंत्री करोड़पति हैं। इनकी औसत घोषित संपत्ति लगभग 6.32 करोड़ रुपये बताई गई है। संपत्ति के मामले में भाजपा के रामा निषाद सबसे आगे हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 31.86 करोड़ रुपये है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के संजय कुमार ने सबसे कम 22.30 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है।


शैक्षणिक योग्यता के संदर्भ में भी रिपोर्ट में विविधता देखने को मिली है। 31 मंत्रियों में से आठ मंत्री (लगभग 26 प्रतिशत) ने अपनी शिक्षा 10वीं से 12वीं कक्षा के बीच बताई है, जबकि 22 मंत्री (लगभग 71 प्रतिशत) स्नातक या उससे उच्च डिग्री धारक हैं। एक मंत्री ने डिप्लोमा स्तर की योग्यता घोषित की है।


आयु संरचना पर नजर डालें तो रिपोर्ट बताती है कि छह मंत्री (19 प्रतिशत) 30 से 50 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं, जबकि 25 मंत्री (81 प्रतिशत) 51 से 80 वर्ष की आयु के बीच हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बिहार मंत्रिमंडल में अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की संख्या अधिक है।


महिला प्रतिनिधित्व के मामले में भी स्थिति कमजोर दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार मंत्रिमंडल के 35 मंत्रियों में से केवल पांच महिलाएं हैं, जो कुल संख्या का मात्र 14 प्रतिशत है। यह आंकड़ा राज्य की राजनीति में लैंगिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े करता है।


कुल मिलाकर ADR और बिहार इलेक्शन वॉच की यह रिपोर्ट बिहार की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति के केंद्रीकरण और कम महिला भागीदारी जैसे मुद्दों को उजागर करती है। यह रिपोर्ट आगामी चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक पारदर्शिता और उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को लेकर एक बार फिर बहस को तेज कर सकती है।