Bihar Road Project 2026: नालंदा जिले के लोगों के लिए सड़क कनेक्टिविटी से जुड़ी बड़ी खबर है. दनियावां-हिलसा-एकंगरसराय-इस्लामपुर-हुलासगंज मार्ग को वर्तमान दो लेन से बढ़ाकर चार लेन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. करीब 44 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए पथ निर्माण विभाग की ओर से संभाव्यता प्रतिवेदन विभाग को भेज दिया गया है.
इस सड़क को फोरलेन में तब्दील करने की मांग को लेकर विकास आनंद एवं टीम आनंद की ओर से सहयोग पोर्टल पर आवेदन दिया गया था. इसके जवाब में हिलसा के कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग ने परियोजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई है.
विभाग के अनुसार, दनियावां-हिलसा-एकंगरसराय-इस्लामपुर-हुलासगंज पथ के 0.00 किमी से 44.155 किमी तक चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए कार्यालय के पत्रांक-881, दिनांक 11 अगस्त 2026 के माध्यम से संभाव्यता प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया है.
285.95 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत
सड़क को दो लेन से चार लेन में बदलने के लिए विभिन्न मौजा में 164.32 एकड़ भूमि पहले से उपलब्ध बताई गई है. वहीं, परियोजना को पूरा करने के लिए 285.95 एकड़ अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया परियोजना के आगे बढ़ने के साथ शुरू की जाएगी.
1655.55 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
करीब 44 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर 1,655.55 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. परियोजना के लिए केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि यानी CRIF मद के तहत प्रस्ताव तैयार किया गया है.
दनियावां-हिलसा-एकंगरसराय-इस्लामपुर-हुलासगंज मार्ग नालंदा के कई महत्वपूर्ण इलाकों को आपस में जोड़ता है. इसके फोरलेन होने से इस रूट पर आवागमन करने वाले लोगों को सड़क की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है.
सड़क को फोरलेन बनाने की मांग को लेकर इस्लामपुर के विधायक रूहेल रंजन भी प्रयासरत हैं. जानकारी के अनुसार, उन्होंने पिछले दिनों नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इस सड़क के चौड़ीकरण की मांग प्रमुखता से रखी थी.
सड़क के चौड़ीकरण से हिलसा, एकंगरसराय और इस्लामपुर समेत आसपास के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. इसके साथ ही व्यापारिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और स्थानीय आवागमन में भी सुविधा मिलने की बात कही जा रही है.
पथ निर्माण विभाग की ओर से संभाव्यता प्रतिवेदन भेजे जाने के बाद अब परियोजना की स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया पर काम होना है. इसके बाद भूमि अधिग्रहण समेत निर्माण से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ेगी.





