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बिहार की बेटियों के लिए बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री बालिका PhD फेलोशिप के तहत हर महीने मिलेंगे ₹10 हजार रूपये

बिहार सरकार की मुख्यमंत्री बालिका PhD फेलोशिप योजना के तहत हर साल 1,000 छात्राओं का चयन होगा। चयनित शोधार्थियों को 4 साल तक हर महीने ₹10,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

बिहार न्यूज
हर साल 1000 छात्राओं का होगा चयन
© AI-generated image
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

PATNA: पटना विश्वविद्यालय की शोधार्थी खुशबू रानी बताती हैं कि पिछले तीन सालों से बिना फेलोशिप के रिसर्च करना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। बॉटनी की छात्रा होने के कारण लैब टेस्ट और केमिकल्स जैसे हर छोटे-बड़े खर्च के लिए उन्हें अपने परिवार पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब बिहार सरकार की मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप की घोषणा के बाद, वह खुश हैं क्यूंकि अब वो आत्मनिर्भर होकर अपना शोध कार्य कर सकेंगी। रक्षाबंधन के अवसर पर शोधार्थियों को मिली इस बेहतरीन सौगात के लिए उन्होंने 'सम्राट भैया' का धन्यवाद व्यक्त किया है।


बिहार में उच्च शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य की बेटियों को एक अनमोल उपहार देते हुए 'मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप' लागू करने की घोषणा की थी।


आपको बता दें कि इस महत्वाकांक्षी स्कीम को 55 करोड़ रुपये के प्रस्तावित कुल बजट के साथ लागू किया जाएगा। योजना के तहत हर साल 1,000 चयनित छात्राओं को पीएचडी की पढ़ाई और रिसर्च के लिए लाभ मिलेगा।  साथ ही इन छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए हर माह दी जाने वाली 9,000 रुपये की फेलोशिप से भी अधिक है।


इन विश्वविद्यालयों की छात्राओं को मिलेगा फायदा

यह स्कीम राज्य की लगभग सभी बड़ी यूनिवर्सिटीज में लागू होगी। पटना यूनिवर्सिटी, पाटलिपुत्र, आर्यभट्ट ज्ञान, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान, कृषि विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह, मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी, मगध, जेपी, एलएनएमयू (दरभंगा), कामेश्वर सिंह संस्कृत यूनिवर्सिटी, बीआरए, मुंगेर, पूर्णिया, तिलका मांझी और बीएन मंडल यूनिवर्सिटी तक इसका दायरा होगा।


यही नहीं, एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट, एलएन मिश्रा, चंद्रगुप्त और डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (पटना) की लड़कियां भी इसका पूरा फायदा उठा सकेंगी।


अक्सर देखा जाता है कि प्रतिभा होने के बावजूद पैसों की तंगी के कारण कई छात्राएं अपनी पीएचडी पूरी नहीं कर पातीं। लेकिन अब इस पहल से बेटियों को रिसर्च के क्षेत्र में न सिर्फ एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि उनके सपनों को भी एक नया पहचान मिलेगा।


राज्य सरकार की इस पहल का लक्ष्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा और अनुसंधान के महत्वपूर्ण क्षेत्र में बेटियों की उपस्थिति को सशक्त करना है। इस योजना के माध्यम से छात्राओं को विज्ञान, कला और मानविकी जैसे विषयों में गहराई से शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकें।


फेलोशिप को लेकर क्या कहती हैं छात्राएं?

"रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर शोधार्थियों के लिए 10,000 रुपये की जो घोषणा की गई है, वह हमारे लिए बहुत बड़ी सहायता है। रिसर्च में टेस्टिंग से लेकर लैब वर्क, ट्रैवल, इक्विपमेंट्स, टूल्स और डॉक्यूमेंटेशन तक का सारा खर्च पहले हमें खुद उठाना पड़ता था। खासकर साइंस स्ट्रीम की छात्राओं को इसमें सबसे ज्यादा खर्च लगता है, जिसे लेकर हम काफी परेशान रहते थे। यह आर्थिक सहायता हमारे लिए एक बहुत बड़ा कदम है। इसके लिए मैं सीएम सर को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूँ।"— नाजिया हसनैन (शोधार्थी, बॉटनी विभाग, पटना विश्वविद्यालय)


"यूजीसी नेट जेआरएफ जैसी परीक्षा पास करने के बाद बेहतर विषय पर पीएचडी करना हर छात्रा का सपना होता है। कई बार प्रतिभा होने के बावजूद पैसे की कमी के कारण लड़कियाँ रिसर्च के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पातीं। मुख्यमंत्री जी द्वारा शुरू की गई यह फेलोशिप योजना हम जैसी छात्राओं के लिए एक वरदान और बड़ा प्रोत्साहन है। इससे हमें बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने शोध विषय पर गहराई से काम करने की आजादी मिलेगी। इससे बिहार की बेटियां शिक्षा जगत में राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रौशन करेंगी।" — आरती कुमारी (यूजीसी नेट जेआरएफ जून 2026 टॉपर, 99.5 पर्सेंटाइल, पॉलिटिकल साइंस)


"उच्च शिक्षा प्राप्त कर पीएचडी जैसी बड़ी डिग्री हासिल करना हर आम छात्रा का सपना होता है। कई बार पढ़ने की ललक होने के बावजूद सिर्फ पैसों की कमी के कारण हम जैसी लड़कियां रिसर्च के क्षेत्र तक नहीं पहुंच पातीं। लेकिन बिहार में कन्या के जन्म से लेकर नौकरियों में 35% आरक्षण तक, सरकार ने हमेशा बेटियों का हाथ थामा है। मुख्यमंत्री जी द्वारा शुरू की गई ₹10,000 प्रतिमाह की यह फेलोशिप योजना हम जैसी छात्राओं के लिए एक बड़े वरदान और प्रोत्साहन की तरह है। इससे हमें बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी डॉक्टरल डिग्री पूरी करने की पूरी आजादी मिलेगी। इस ऐतिहासिक पहल के लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी का आभार व्यक्त करती हूँ। अब राज्य के आम घरों की बेटियां भी रिसर्च के क्षेत्र में अपना परचम लहराएंगी।"— आरती अनमोल सिंह (छात्रा, बिहार)

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