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Mokama Election Violence : दुलारचंद हत्याकांड की जांच कर रहे IPS अपराजित लोहान का तबादला, अनंत सिंह के अरेस्ट होने के बाद हुई थी तैनाती; फिर चर्चा में बिहार की सियासत और प्रशासन

Mokama Election Violence : बिहार की मोकामा विधानसभा सीट विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से लगातार सुर्खियों में रही। चुनावी रंजिश के बीच जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े

Mokama Election Violence : दुलारचंद हत्याकांड की जांच कर रहे IPS अपराजित लोहान का तबादला, अनंत सिंह के अरेस्ट होने के बाद हुई थी तैनाती; फिर चर्चा में बिहार की सियासत और प्रशासन
Tejpratap
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Mokama Election Violence : बिहार की मोकामा विधानसभा सीट वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान लगातार सुर्खियों में बनी रही। चुनावी सरगर्मी के बीच यहां राजनीतिक रंजिश ने हिंसक रूप ले लिया, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा। जनसुराज के प्रत्याशी का समर्थन कर रहे दुलारचंद यादव की दिनदहाड़े हत्या ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े फेरबदल की जमीन तैयार कर दी।


दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल कायम हो गया था। हालात को देखते हुए प्रशासन पर दबाव बढ़ा और तत्कालीन पटना ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हटा दिया गया। उनकी जगह वर्ष 2020 बैच के युवा और तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अपराजित लोहान को पटना ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई। माना जा रहा था कि अपराजित लोहान की सख्त कार्यशैली इस संवेदनशील मामले की जांच को निर्णायक दिशा देगी।


अपराजित लोहान ने मोकामा के निर्वाचित विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद पटना ग्रामीण एसपी का कार्यभार संभाला था। वे दुलारचंद हत्याकांड की गहन जांच में जुटे हुए थे और शुरुआती स्तर पर कई अहम पहलुओं को खंगाला जा रहा था। लेकिन महज दो महीने के भीतर ही उनका तबादला कर दिया गया, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए।


अब अपराजित लोहान को जहानाबाद जिले का नया एसपी नियुक्त किया गया है। वहीं पटना ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी कुंदन कुमार को सौंपी गई है। ऐसे में दुलारचंद हत्याकांड की जांच अब कुंदन कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। यह देखना अहम होगा कि नई टीम इस संवेदनशील मामले में किस गति और दिशा से काम करती है।


गौरतलब है कि इस हत्याकांड से जुड़े मामले में अब भी मोकामा के निर्वाचित विधायक अनंत सिंह जेल में बंद हैं। अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही अपने विरोधी प्रत्याशी वीणा देवी को करीब 28 हजार वोटों से हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी। हालांकि अब तक उन्होंने विधायक पद की शपथ नहीं ली है। नियमों के अनुसार उनके पास शपथ लेने के लिए लगभग पांच महीने का समय शेष है, और यदि वे इस अवधि में शपथ नहीं लेते हैं तो उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा सकता है।


अनंत सिंह ने अब तक दो बार जमानत की अर्जी दाखिल की है, लेकिन दोनों ही बार अदालत से उन्हें निराशा हाथ लगी। फिलहाल वे जेल में ही हैं और यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि वे कब तक बाहर आ पाएंगे। मोकामा की राजनीति में उनकी मौजूदगी और प्रभाव को देखते हुए यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर रहा है।


आईपीएस अपराजित लोहान की बात करें तो उन्हें बिहार कैडर के सबसे युवा और सक्रिय अधिकारियों में गिना जाता है। पटना ग्रामीण एसपी बनने से पहले वे पटना ट्रैफिक एसपी के रूप में तैनात थे, जहां उन्होंने अपनी सख्त और जमीनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए वे खुद सड़कों पर उतरे और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की।


उनकी कार्यशैली की सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई जब उन्होंने नो-पार्किंग जोन में खड़ी नेताओं और वीआईपी गाड़ियों के भी चालान कटवाए। इससे साफ संदेश गया कि कानून सबके लिए बराबर है। यही वजह है कि आम जनता के बीच उनकी छवि एक ईमानदार और निर्भीक अधिकारी की बनी।


अपराजित लोहान मूल रूप से हरियाणा के हिसार जिले के निवासी हैं। वे वर्ष 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उन्होंने स्वेच्छा से बिहार कैडर का चयन किया था। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत रही है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की है। वर्ष 2014 से 2018 के बीच आईआईटी बॉम्बे में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा हिसार के सेंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल से हुई है।


अब जब अपराजित लोहान जहानाबाद के एसपी की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, तो एक बार फिर उनसे सख्त और प्रभावी पुलिसिंग की उम्मीद की जा रही है। वहीं मोकामा हत्याकांड की जांच नए एसपी के हाथों में जाने से यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले में क्या नए खुलासे सामने आते हैं और बिहार की राजनीति व प्रशासन में इसका क्या असर पड़ता है।