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Ashok Dham Stamped : 8 मौतों के बाद खुली प्रशासन की आंख! अब अशोक धाम में CCTV, बैरिकेडिंग और ‘एक ट्रेन’ का ज्ञान

लखीसराय के अशोक धाम में भगदड़ से 8 श्रद्धालुओं की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट हुआ है। अब रेलवे को CCTV, बैरिकेडिंग और एक समय में एक ट्रेन के ठहराव समेत कई सुझाव दिए गए हैं।

Ashok Dham Stamped : 8 मौतों के बाद खुली प्रशासन की आंख! अब अशोक धाम में CCTV, बैरिकेडिंग और ‘एक ट्रेन’ का ज्ञान
Tejpratap
Tejpratap
7 मिनट

लखीसराय। कहते हैं कि हादसे बहुत कुछ सिखा जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल तब उठता है जब सबक सीखने की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़े तो फायदा क्या? लखीसराय के अशोक धाम में पिछले सोमवार हुई भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत के बाद अब जिला प्रशासन की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। जिस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले से ठोस योजना बननी चाहिए थी, उस पर अब हादसे के बाद बैठकों, पत्राचार और सुझावों का दौर शुरू हो गया है।

अब प्रशासन को याद आया है कि अशोक धाम हाल्ट पर सीसीटीवी कैमरे जरूरी हैं, प्रवेश और निकास की व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए, बैरिकेडिंग लगनी चाहिए और एक समय में सिर्फ एक ट्रेन का ठहराव होना चाहिए। सवाल यह है कि क्या ये व्यवस्थाएं करने के लिए 8 लोगों की जान जाना जरूरी था?

जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर अशोक धाम हाल्ट की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। पत्र में आरपीएफ, जीआरपी, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी बताई गई है।

पहले हादसा, फिर सुझावों की फाइल

अशोक धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कोई नई बात नहीं है। खास दिनों में यहां हजारों लोग पहुंचते हैं और प्रशासन को भी भीड़ के दबाव का अंदाजा रहता है। इसके बावजूद पिछले सोमवार की भगदड़ में 8 लोगों की जान चली गई। अब उसी के बाद प्रशासन ने रेलवे को सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की लंबी सूची भेजी है।

सबसे अहम सुझाव है कि एक समय में अशोक धाम हाल्ट पर केवल एक ही ट्रेन का ठहराव हो। अप और डाउन दिशा से एक साथ ट्रेनों के पहुंचने पर भीड़ का दबाव बढ़ सकता है। यह बात अब प्रशासन को समझ आई है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या पहले यह अंदाजा नहीं लगाया गया था कि दो ट्रेनों से एक साथ उतरने वाले यात्रियों की भीड़ स्टेशन और मंदिर मार्ग पर दबाव बढ़ा सकती है?

अब चेन पुलिंग पर भी नजर

डीएम ने रेलवे को वैक्यूम और चेन पुलिंग की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा है। भीड़ के दौरान अनधिकृत तरीके से ट्रेनों के रुकने पर अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है और हालात बिगड़ सकते हैं।यानी अब प्रशासन हर उस कारण को चिह्नित कर रहा है, जो भीड़ बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि भीड़ वाले दिनों में ऐसी संभावनाओं का आकलन पहले से क्यों नहीं किया गया?

CCTV अब जरूरी, पहले शायद नहीं था जरूरी!

अशोक धाम हाल्ट पर अब सीसीटीवी कैमरे लगाने को अत्यंत आवश्यक बताया गया है। स्टेशन पर प्रवेश और निकास की व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त करने की बात कही गई है। कैमरों के जरिए निगरानी और अलग-अलग रास्तों से श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने की योजना है। लेकिन हादसे के बाद सामने आए इन सुझावों ने पिछली व्यवस्था की पोल खोल दी है। इतना बड़ा धार्मिक स्थल, भारी भीड़ और संवेदनशील हालात के बावजूद निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं, यह अब बड़ा सवाल बन गया है।

बैरिकेडिंग के लिए अब NOC, पहले भीड़ अपने भरोसे?

जिला प्रशासन ने अशोक धाम स्टेशन के आसपास भीड़ नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था जरूरी बताई है। इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की बात कही गई है। भीड़ प्रबंधन में बैरिकेडिंग सबसे बुनियादी व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि इसकी जरूरत अब इतनी महत्वपूर्ण है तो हादसे से पहले इसे लेकर तैयारी क्यों नहीं हुई? क्या श्रद्धालुओं की भीड़ पहले अपने भरोसे ही नियंत्रित हो रही थी?

सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक सुरक्षा, अब आई जरूरत

जिलाधिकारी ने आरपीएफ, जीआरपी, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को बेहतर समन्वय के साथ ड्यूटी करने की जरूरत बताई है। सुरक्षा बलों को सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रखने पर जोर दिया गया है। यानी अब प्रशासन मान रहा है कि अशोक धाम में लंबे समय तक और लगातार सुरक्षा निगरानी जरूरी है। लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहले भी इसी समयावधि में आती रही है। फिर सुरक्षा बलों की ऐसी व्यापक तैनाती पहले से क्यों नहीं की गई?

बंद पड़े नल भी अब याद आए

पत्र में अशोक धाम हाल्ट पर बंद पड़े पानी के नलों को भी अविलंब चालू कराने का अनुरोध किया गया है। हादसे के बाद अब पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल हो गई है। यह स्थिति पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। यदि नल बंद थे तो उनकी जानकारी पहले किसे थी? क्या नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा था? और यदि हो रहा था तो उन्हें चालू क्यों नहीं कराया गया?

सबसे बड़ा सवाल, जिम्मेदारी किसकी?

8 लोगों की मौत के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की कवायद शुरू हो चुकी है। रेलवे को पत्र लिखा गया है, सुझाव दिए गए हैं और नई व्यवस्थाओं पर जोर है। यह सब जरूरी है और भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

लेकिन सवाल केवल आगे की व्यवस्था का नहीं है। सवाल पिछली तैयारियों का भी है। आखिर इतनी बड़ी धार्मिक भीड़ के बावजूद भीड़ नियंत्रण की पहले से मजबूत योजना क्यों नहीं थी? एक साथ ट्रेनों के ठहराव, CCTV, बैरिकेडिंग, प्रवेश-निकास और सुरक्षा बलों के समन्वय जैसे मुद्दे हादसे के बाद ही प्राथमिकता क्यों बने?

अशोक धाम हादसे में 8 लोगों की मौत ने प्रशासन और रेलवे की तैयारियों पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि हादसे के बाद सुझाए गए उपाय जमीन पर कितनी जल्दी उतरते हैं या फिर कुछ दिनों की सक्रियता के बाद यह मामला भी फाइलों और पत्राचार में सिमट जाता है। फिलहाल, अशोक धाम में 8 जिंदगियां जाने के बाद शुरू हुई तैयारियों पर एक सवाल सबसे भारी है—क्या प्रशासन को जागने के लिए हमेशा किसी बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा?