JAMUI:बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। जमुई जिले के झाझा से सामने आई एक तस्वीर ने सिस्टम की पूरी सच्चाई उजागर कर दी है।
यहां 5.75 करोड़ रुपये की लागत से बना नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उद्घाटन के बाद भी बंद पड़ा है और महज शो-पीस या यू कहे कि हाथी का दांत बनकर रह गया है। दूसरी ओर, पुराने अस्पताल भवन में बेड की भारी कमी के कारण मरीजों को फर्श पर लेटकर इलाज का इंतजार करना पड़ रहा है।
मंगलवार दोपहर की एक मार्मिक घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया। झाझा के चरघरा निवासी निर्मला देवी अपने बीमार पति प्रदीप साव को लेकर अस्पताल पहुंचीं, लेकिन बेड खाली न होने के कारण उन्हें फर्श पर ही लिटाकर घंटों इंतजार करना पड़ा। तपती गर्मी में वह अपने पति को गोद में लेकर फर्श पर बैठी रहीं।
जब मीडिया ने उनसे बात की तो उन्होंने बेबसी भरे शब्दों में कहा, “क्या करें साहब? बेड खाली नहीं है।” कैमरा देखते ही अस्पताल कर्मी मौके पर पहुंचे और मरीज को इलाज के लिए अंदर ले गए। जानकारी के अनुसार, प्रदीप साव की तबीयत करीब 30 घंटे से खराब थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका। मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
इस पूरे मामले पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नवाब ने कहा कि नए भवन में सेवाएं शुरू होने के बाद ऐसी समस्याएं नहीं होंगी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि उद्घाटन के एक महीने बाद भी नया अस्पताल शुरू क्यों नहीं हो पाया। आखिर आम जनता को इन सुविधाओं का लाभ कब तक मिलेगा? यह सवाल लोग बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से कर रहे हैं।




