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बिहार के बेटे ने किया कमाल: ऋषि दीक्षित ने विकसित की सीखने और याददाश्त बढ़ाने वाली AI डिवाइस, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

Bihar News: गोपालगंज के ऋषि दीक्षित और उनकी टीम ने शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और विशेष शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली AI डिवाइस विकसित की, भारत सरकार से डिजाइन पंजीकरण प्राप्त किया है।

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Mukesh Srivastava
2 मिनट

Bihar News: गोपालगंज के दीक्षितौली गांव निवासी ऋषि दीक्षित ने अपनी टीम के साथ मिलकर एक सीखने और स्मृति बढ़ाने वाली AI डिवाइस विकसित की है। इस उपकरण को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पंजीकरण प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिवाइस शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और विशेष शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।


रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ऋषि और उनकी टीम ने यह उपकरण बनाया है। ऋषि दीक्षित ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के शोध-उन्मुख वातावरण और टीम के लगातार परिश्रम का परिणाम है। उनका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से शिक्षा को अधिक सुगम और प्रभावी बनाना है।


जितेंद्र दीक्षित और शीला देवी के पुत्र ऋषि की प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने इंटर और स्नातक की पढ़ाई उत्तर प्रदेश में पूरी की। स्नातक में स्वर्ण पदक विजेता रहे ऋषि वर्तमान में विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में शोध कर रहे हैं। उनकी इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी की लहर है।


ऋषि दीक्षित, प्रोफेसर यूवी किरण और स्मृति सिंह द्वारा विकसित यह उपकरण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित है। यह डिवाइस सीखने की क्षमता और समझने की शक्ति को बढ़ाता है, याददाश्त और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार करता है। इसके अलावा, यह उपयोगकर्ता के प्रदर्शन का तुरंत विश्लेषण कर व्यक्तिगत प्रशिक्षण प्रदान करता है।


डिवाइस को डिजाइन अधिनियम, 2000 के तहत पंजीकृत किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपकरण शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, विशेष शिक्षा (दिव्यांग बच्चों के लिए), बुजुर्गों के मानसिक प्रशिक्षण और पुनर्वास जैसे क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी साबित होगा। इससे छात्रों और विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों की सीखने की क्षमता वैज्ञानिक तरीके से मजबूत होगी।

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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