Bihar bypass project: गोपालगंज की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना बाइपास सड़क के निर्माण का रास्ता अब और साफ हो गया है. प्रस्तावित बाइपास के लिए 4.8 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्टेज-1 की वन मंजूरी मिल गई है. मंत्रालय ने 26 शर्तों के साथ यह अनुमति दी है. मंजूरी मिलने के बाद परियोजना से जुड़ी वन भूमि की प्रक्रिया में एक अहम चरण पूरा हो गया है.
गोपालगंज बाइपास सड़क की कुल लंबाई 12.60 किलोमीटर होगी. यह सड़क एनएच-27 के दानापुर से एनएच-531 के तुरकाहां तक बनाई जाएगी. दो लेन की इस सड़क में पक्के सोल्डर का भी प्रावधान है. बाइपास का मार्ग मांझागढ़ और देवापुर-कबिलासपुर क्षेत्र से होकर गुजरेगा.
परियोजना पर 10,351.31 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य 3 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया था और इसे 7 अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
बाइपास निर्माण के लिए प्रस्तावित वन भूमि के अपयोजन की मंजूरी पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी शर्तों के साथ दी गई है. इसके तहत समतुल्य गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित कर उसे सुरक्षित वन के रूप में अधिसूचित करने का प्रावधान है. इसके अलावा निर्धारित मानकों के अनुसार क्षतिपूरक पौधारोपण भी किया जाएगा.
इससे सड़क निर्माण की परियोजना के साथ वन भूमि की भरपाई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को भी लागू किया जाएगा.
गोपालगंज बाइपास परियोजना की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान की गई थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर परियोजना से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं और प्रस्ताव को आगे भेजा. अब स्टेज-1 वन मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.
बाइपास परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चल रही है. परियोजना के तहत 1.73 एकड़ भूमि के भू-धारियों को धारा 21(2) के तहत नोटिस जारी कर तामिला कराया जा चुका है. प्रशासन की ओर से भू-अर्जन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की कार्रवाई की जा रही है.
गोपालगंज बाइपास के तैयार होने के बाद भारी और बाहरी वाहनों को शहर के मुख्य हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत कम होगी. इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होने और जाम की समस्या में राहत मिलने की उम्मीद है.
बाइपास के जरिए वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलने से यात्रा समय और ईंधन की बचत हो सकती है. इसके साथ ही शहर में यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा को भी बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
बाइपास सड़क बनने से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. गन्ना सहित अन्य कृषि उत्पादों को चीनी मिलों और बाजारों तक पहुंचाने में किसानों को सुविधा मिलने की उम्मीद है.
बेहतर सड़क संपर्क से परिवहन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कृषि आधारित कारोबार, छोटे उद्योग, होटल-रेस्तरां और सर्विस सेक्टर के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.





