Patna News: पटना में आवासीय मकान या परिसर का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों की मुश्किल बढ़ सकती है. पटना नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में अनधिकृत गैर-आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए हैं. निगम के सर्वे में ऐसे 26,746 मामले सामने आए हैं. नोटिस मिलने के बाद संबंधित संपत्ति मालिकों को अंचल कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे.
नगर निगम की ओर से जारी नोटिस का जवाब संबंधित अंचल कार्यालय में किसी भी कार्यदिवस को दिया जा सकता है. इसके लिए पहले अंचल कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर निर्धारित फार्म जमा करना होगा. इसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी सुनवाई की तारीख तय करेंगे. तय तारीख पर संबंधित व्यक्ति को जरूरी दस्तावेजों के साथ लिखित रूप से अपना पक्ष रखना होगा.
जरूरत पड़ने पर ले सकते हैं दूसरी तारीख
अगर नोटिस पाने वाला व्यक्ति किसी जरूरी काम से बाहर है या निर्धारित तारीख पर सुनवाई में शामिल नहीं हो सकता, तो वह अंचल कार्यालय में अनुरोध कर सुनवाई के लिए बाद की तारीख ले सकता है.
हाल ही में पाटलिपुत्र अंचल कार्यालय में गोसाईं टोला निवासी द्रौपदी देवी के पुत्र ने कार्यपालक पदाधिकारी पुण्य तरु के समक्ष अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि उनकी संपत्ति का इस्तेमाल पूरी तरह आवासीय रूप में किया जा रहा है. इसके बावजूद उन्हें दूसरी श्रेणी में नोटिस जारी किया गया है.
सिर्फ रहने के लिए इस्तेमाल हो रहा मकान तो क्या करें
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, अगर किसी मकान का इस्तेमाल सिर्फ रहने के लिए किया जा रहा है, लेकिन रिकॉर्ड में उससे व्यावसायिक टैक्स लिया जा रहा है या उसे दूसरी श्रेणी में दर्ज कर दिया गया है, तो मकान मालिक जरूरी कागजात के साथ शपथ पत्र जमा कर सकते हैं.
इसके बाद नगर निगम की टीम संबंधित संपत्ति का स्थल निरीक्षण करेगी. जांच में अगर यह पुष्टि होती है कि मकान का इस्तेमाल पूरी तरह आवासीय है, तो निगम के रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी म्यूटेशन में आवश्यक सुधार किया जा सकता है.
नोटिस के जवाब में देने होंगे ये दस्तावेज
सुनवाई के दौरान संपत्ति मालिकों से जमीन और मकान से जुड़े कई दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. इनमें निबंधित डीड या खतियानी जमीन की छायाप्रति, अंचलाधिकारी कार्यालय से संबंधित दाखिल-खारिज के कागजात, स्वीकृत नक्शा, व्यावसायिक गतिविधि या प्रतिष्ठान का रजिस्ट्रेशन और आधार कार्ड की छायाप्रति शामिल है.
अगर किसी संपत्ति का स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित व्यक्ति को लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के हुआ है और वह जल्द से जल्द नक्शा स्वीकृत कराने की प्रक्रिया पूरी करेगा.
‘अन्य श्रेणी’ में भी बड़ी संख्या में नोटिस
नगर निगम ने कई संपत्तियों को ‘अन्य श्रेणी’ में रखते हुए भी नोटिस भेजा है. इस श्रेणी में संपत्ति पर चल रही गतिविधि स्पष्ट नहीं है. नूतन राजधानी अंचल के राजा बाजार के कुछ लोग भी नोटिस को लेकर निगम कार्यालय पहुंचे. उनका कहना था कि उनके घर में किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं चल रही है.
महापौर सीता साहू को भी अजीमाबाद अंचल से ‘अन्य श्रेणी’ में नोटिस जारी किया गया था.
आवासीय संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल नियमों के खिलाफ
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि चेन्नई में सामने आए कुछ मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देशभर के नगर निकायों को आवासीय क्षेत्रों में चल रही गैर-आवासीय गतिविधियों को चिह्नित करने का निर्देश दिया गया था. इसी के तहत पटना नगर निगम ने भी सर्वे कराया.
सर्वे के दौरान आवासीय क्षेत्रों में गैर-आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े 26,746 मामले सामने आए हैं. हालांकि, नगर आयुक्त ने यह भी कहा कि इस आंकड़े को पूरी तरह अंतिम नहीं माना जा सकता. निगम ने मास्टर प्लान-2031 की जियोस्पेशल रिपोर्ट और अपने पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों को डिजिटल मैप पर मिलाकर ऐसी संपत्तियों की पहचान की है.
पाटलिपुत्र और राजेंद्र नगर समेत कुछ इलाके पहले से अधिसूचित आवासीय क्षेत्र हैं. ऐसे क्षेत्रों में आवासीय संपत्ति का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है. नगर निगम अब नोटिस के जरिए संपत्ति मालिकों से उनकी स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है.





