Bihar Road Construction: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में कई बड़ी परियोजनाओं को लेकर कवायद तेज हो गई है। हाजीपुर से मुजफ्फरपुर के बीच करीब 50 किलोमीटर लंबा नया कांवरिया पथ विकसित करने की योजना है। इसके लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की मंजूरी मिल गई है। प्रस्तावित कांवरिया पथ को एनएच-22 के किनारे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की जमीन पर विकसित किया जाएगा।
इस सड़क को खास तौर पर सावन के दौरान बाबा गरीबनाथ मंदिर जाने वाले कांवरियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। करीब 6 मीटर चौड़ा यह अलग मार्ग बनने के बाद श्रद्धालुओं को हाईवे पर पैदल चलने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो सकती है। साथ ही एनएच-22 पर वाहनों की आवाजाही भी सुचारू रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हाजीपुर-मुजफ्फरपुर के बीच बनेगा अलग कांवरिया कॉरिडोर
पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात के दौरान बिहार की कई महत्वपूर्ण सड़क और पुल परियोजनाओं को लेकर चर्चा की। इसी दौरान हाजीपुर से मुजफ्फरपुर के बीच प्रस्तावित कांवरिया पथ की DPR तैयार करने को लेकर भी सहमति बनी। इस मार्ग को सुल्तानगंज-बाबाधाम कांवरिया पथ की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य कांवरियों को सुरक्षित और व्यवस्थित पैदल मार्ग उपलब्ध कराना है।
सारण के पहलेजा घाट से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हाईवे की एक लेन को कई दिनों तक बंद रखना पड़ता है। इससे हाईवे पर ट्रैफिक दबाव बढ़ता है और कई जगह जाम की स्थिति बन जाती है। अलग कांवरिया पथ बनने के बाद इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। कांवरियों को अलग रास्ता मिलने से एनएच-22 पर सामान्य यातायात को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
बिहार में कई बड़े रोड प्रोजेक्ट पर फोकस
केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक में सिर्फ कांवरिया पथ ही नहीं, बल्कि बिहार की कई बड़ी सड़क परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क संपर्क बेहतर करना और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों की क्षमता बढ़ाना है।
बैठक में मुजफ्फरपुर-बरौनी एनएच-122 के फोरलेन चौड़ीकरण और मुजफ्फरपुर ईस्टर्न बाइपास से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसके अलावा एनएच-139 को नौबतपुर से झारखंड सीमा तक चार लेन करने की योजना भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में रही। इन सड़कों के चौड़ीकरण से बिहार और झारखंड के बीच आवागमन आसान होने के साथ-साथ माल ढुलाई को भी गति मिलने की उम्मीद है।
विक्रमशिला सेतु के समानांतर पॉन्टून ब्रिज का प्रस्ताव
भागलपुर क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए विक्रमशिला सेतु के समानांतर पॉन्टून ब्रिज के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा बिहपुर-फुलौत कोसी पुल से जुड़े संपर्क मार्ग और एप्रोच रैंप को लेकर भी प्रस्ताव रखा गया।भागलपुर-बालदौर एनएच-133E परियोजना और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी योजनाओं पर भी केंद्रीय स्तर पर चर्चा की गई। इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार के सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है।
हाजीपुर-बिदुपुर के बीच एलिवेटेड रोड भी एजेंडे में
हाजीपुर से बिदुपुर तक गंगा के उत्तरी किनारे एलिवेटेड सड़क बनाने का प्रस्ताव भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखा गया। यह परियोजना उत्तर बिहार में यातायात व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।एलिवेटेड रोड बनने से स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात को अलग-अलग रास्ता मिलने की संभावना है। इससे प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक दबाव कम करने और यात्रा का समय घटाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा एनएच-333 और एनएच-333A से संबंधित परियोजनाओं तथा केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि के तहत नई योजनाओं की स्वीकृति को लेकर भी चर्चा हुई।
सड़क परियोजनाओं को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद
पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र के अनुसार, बैठक में एनएच-139 के कायाकल्प, मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन, मुजफ्फरपुर ईस्टर्न बाइपास, नौबतपुर से झारखंड सीमा तक फोरलेन सड़क, जमुई क्षेत्र में चार लेन सड़क और जमुआ नदी पर चार लेन पुल जैसी योजनाओं को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
इन परियोजनाओं को मंजूरी और जमीन पर काम शुरू होने के बाद बिहार के सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और झारखंड से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर यातायात क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
सड़क नेटवर्क मजबूत होने से विकास को मिलेगी रफ्तार
बिहार में सड़क और पुल परियोजनाओं का विस्तार केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क से व्यापार, उद्योग, पर्यटन, कृषि उत्पादों की आवाजाही और माल ढुलाई को भी फायदा मिल सकता है। खास तौर पर हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बरौनी, भागलपुर, जमुई और झारखंड सीमा को जोड़ने वाली परियोजनाएं राज्य के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को नया आधार दे सकती हैं।
पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने का भरोसा जताया है। आने वाले समय में इन प्रस्तावित सड़क और पुल परियोजनाओं की मंजूरी और निर्माण की प्रक्रिया बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।





