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निलंबन वापस, फिर भी खत्म नहीं हुई हड़ताल: आखिर क्यों अड़े हैं बिहार के राजस्व कर्मचारी?

Bihar News: बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल और निलंबन वापसी को लेकर विवाद जारी है। सरकार के आदेश के बावजूद कर्मचारी अभी भी हड़ताल पर अड़े हैं, जिससे राजस्व कार्य प्रभावित हो रहा...

निलंबन वापस, फिर भी खत्म नहीं हुई हड़ताल: आखिर क्यों अड़े हैं बिहार के राजस्व कर्मचारी?
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल अब एक जटिल और लंबा खिंचता हुआ विवाद बन चुकी है। सरकार द्वारा 200 से अधिक निलंबित कर्मियों को बहाल करने का फैसला लेने के बावजूद कर्मचारी अब भी काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं। सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने नरमी दिखाई है, तो फिर कर्मचारी अपनी हड़ताल खत्म क्यों नहीं कर रहे?


दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी, जब राज्यभर के राजस्व कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। उस समय के राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त रुख अपनाया और कई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई से कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया और मामला और भी उलझता चला गया।


अब हाल ही में सम्राट चौधरी की सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए निलंबन वापस लेने का निर्देश दिया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए कर्मियों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाए। कागजों पर यह एक राहत भरा फैसला था, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही है।


असल समस्या आदेश के क्रियान्वयन को लेकर सामने आ रही है। विभाग ने भले ही निलंबन खत्म करने का निर्देश दिया हो, लेकिन जिलों के अधिकारी इसे सीधे-सीधे लागू करने के बजाय “पहले ज्वाइन करें, फिर बहाली होगी” की शर्त रख रहे हैं। यानी कर्मचारियों से कहा जा रहा है कि वे पहले हड़ताल खत्म कर काम पर लौटें, तभी उनका निलंबन समाप्त माना जाएगा।


यही बात राजस्व कर्मचारी संघ को मंजूर नहीं है। संघ का कहना है कि जब सरकार ने निलंबन वापस लेने का निर्णय ले लिया है, तो उसे बिना शर्त लागू किया जाना चाहिए। कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें पहले से ही दो महीने से ज्यादा समय तक हड़ताल पर रहना पड़ा है, लेकिन उनकी मूल मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। ऐसे में सिर्फ निलंबन वापस लेना उनके लिए पर्याप्त नहीं है।


एक और अहम पहलू यह है कि बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 के तहत नियुक्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार जिलों के समाहर्ताओं को दिया गया है। इसी वजह से हर जिले में अलग-अलग तरीके से आदेश की व्याख्या हो रही है, जिससे स्थिति और भ्रमित हो गई है। कहीं बहाली की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो कहीं अभी भी कर्मचारी असमंजस में हैं।


विभाग का कहना है कि स्थिति अब स्पष्ट है और प्रशासनिक कार्यों को सामान्य करने के लिए कर्मचारियों को काम पर लौटना चाहिए। लेकिन कर्मचारियों का तर्क है कि जब तक उनकी बाकी मांगों जैसे सेवा शर्तों में सुधार, वेतन से जुड़े मुद्दे और कार्यस्थल की समस्याओं पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।


इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि केवल निलंबन वापस लेना ही समस्या का समाधान नहीं है। कर्मचारियों और सरकार के बीच भरोसे की कमी और संवाद का अभाव इस विवाद को लंबा खींच रहा है। जब तक दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर स्पष्ट और ठोस समाधान नहीं निकालते, तब तक यह हड़ताल खत्म होना मुश्किल नजर आ रहा है।