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Bihar Paper Leak : बिहार में पेपर लीक का नया खेल! लॉज से चलता था सिंडिकेट, सरकारी मुहर और फर्जी दस्तावेजों का बड़ा खुलासा

गया में पुलिस ने भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने की बड़ी साजिश नाकाम कर दी। लॉज और कार से प्रश्नपत्र, सरकारी मुहर, फर्जी दस्तावेज, चेकबुक और अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्र बरामद होने से बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ।

Bihar Paper Leak : बिहार में पेपर लीक का नया खेल! लॉज से चलता था सिंडिकेट, सरकारी मुहर और फर्जी दस्तावेजों का बड़ा खुलासा
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Bihar Paper Leak : बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बनाने वाले कथित पेपर लीक नेटवर्क की एक और बड़ी साजिश सामने आई है। इस बार मामला गया जिले से जुड़ा है, जहां पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर बिहार पुलिस रेडियो वायरलेस भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने की कथित योजना को विफल कर दिया। पुलिस की छापेमारी में जो सामान बरामद हुआ है, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। एक साधारण लॉज के कमरे से लेकर एक ब्रेजा कार तक, हर जगह ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो किसी बड़े संगठित गिरोह की ओर इशारा कर रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह सिर्फ पेपर लीक की कोशिश नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी मुहरों का इस्तेमाल करने और अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्रों के जरिए बड़े स्तर पर परीक्षा से जुड़ी धांधली का नेटवर्क हो सकता है। फिलहाल मामले में दो मुख्य आरोपियों की तलाश जारी है।

गुप्त सूचना के बाद पुलिस का एक्शन, भागने लगे संदिग्ध

जानकारी के अनुसार, बिहार पुलिस रेडियो वायरलेस भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग परीक्षा में गड़बड़ी कराने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही रामपुर थाना पुलिस ने गया शहर के गंगो बिगहा स्थित केपी लॉज में छापेमारी की।

पुलिस को देखते ही वहां मौजूद संदिग्धों में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि कुछ लोग ब्रेजा कार से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने कार को जब्त कर लिया। हालांकि दो संदिग्ध मौके से फरार होने में सफल रहे। एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया।

कार से मिला ऐसा सामान जिसने खोल दी पूरे नेटवर्क की परतें

जब पुलिस ने जब्त ब्रेजा कार की तलाशी ली तो कई चौंकाने वाली चीजें सामने आईं। कार से भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों की फोटो कॉपी, छात्रों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अधिकारी की मुहर, एक बीडीओ के नाम की स्टांप, ब्लैंक चेक और बैंक की चेकबुक बरामद हुई। इतना ही नहीं, पुलिस को कई ऐसे दस्तावेज मिले जिनसे यह आशंका और मजबूत हो गई कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जीवाड़े और परीक्षा संबंधी धांधली में सक्रिय हो सकता है।

लॉज का कमरा बना था कथित सिंडिकेट का ऑपरेशन सेंटर

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने केपी लॉज के एक कमरे की तलाशी ली। यहां जो सामान मिला उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। कमरे से अलग-अलग सरकारी कार्यालयों, कॉलेजों, स्कूलों, एनजीओ और चिकित्सकों के नाम की कुल नौ मुहरें बरामद हुईं। इसके अलावा 18 से 20 अभ्यर्थियों के मूल अंकपत्र और प्रमाणपत्र, कई ब्लैंक चेक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और नाम-पते दर्ज एक डायरी भी मिली। पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल फर्जी पहचान बनाने, अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में हेरफेर करने या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था।

शिक्षक की कार से खुला नया कनेक्शन

पुलिस जांच में सामने आया कि जिस ब्रेजा कार से यह सामान बरामद हुआ, वह गया शहर के कासमी हाई स्कूल में कार्यरत जीव विज्ञान के शिक्षक मो. दिलशाद अहमद के नाम पर पंजीकृत है। वह मूल रूप से टिकारी के रहने वाले बताए जा रहे हैं। स्कूल प्रशासन के अनुसार, घटना वाले दिन वह अवकाश पर थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया और इसमें शिक्षक की क्या भूमिका है। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।

शिवम राय पर मास्टरमाइंड होने का शक

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का संचालन शिवम राय नामक युवक द्वारा किए जाने की आशंका है। बताया जा रहा है कि वह आंती थाना क्षेत्र के दौरमा गांव का रहने वाला है और गंगो बिगहा स्थित केपी लॉज में रहकर पूरे सिंडिकेट का संचालन करता था। पुलिस का दावा है कि फरार आरोपी और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो सकेगा कि नेटवर्क सिर्फ गया तक सीमित था या इसके तार बिहार के अन्य जिलों और भर्ती परीक्षाओं से भी जुड़े हुए हैं।

आधार कार्ड ने भी खोली फर्जी पहचान की पोल

छापेमारी के दौरान बरामद दो आधार कार्ड ने जांच को नया मोड़ दे दिया। एक कार्ड पर शिवम राय का नाम दर्ज है, जबकि दूसरे पर नासिर आलम का नाम लिखा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों कार्डों पर फोटो एक ही व्यक्ति की मिली, जबकि दोनों के पते अलग-अलग दर्ज थे। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या गिरोह फर्जी पहचान बनाकर परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाने या बैंकिंग एवं दस्तावेजी धोखाधड़ी जैसे मामलों में भी शामिल था।

पुलिस का दावा- बड़ी साजिश समय रहते हुई नाकाम

गया के सिटी एसपी अभिनव कुमार ने कहा कि छापेमारी में बरामद सामग्री यह संकेत देती है कि भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी करने की गंभीर तैयारी की गई थी। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर इस प्रयास को विफल कर दिया। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरफ्तारियां होने के बाद पूरे नेटवर्क, उसके आर्थिक स्रोत, सहयोगियों और परीक्षा से जुड़े संभावित कनेक्शन का खुलासा हो सकता है। फिलहाल पुलिस बरामद दस्तावेजों, सरकारी मुहरों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है।