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Bihar MLC Election 2026 : बिहार में MLC चुनाव का अलग खेल! आम वोटर नहीं डालेंगे वोट, जानिए कौन चुनेगा MLC

बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनावी मुकाबला तेज है। लेकिन इन सीटों पर आम जनता वोट नहीं करती। जानिए कौन डालता है वोट, कैसे होती है गिनती और 1, 2, 3 की वरीयता से कैसे तय होती है MLC की जीत।

Bihar MLC Election 2026
Bihar MLC Election 2026
© AI
Tejpratap
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6 मिनट

पटना :  बिहार विधान परिषद की 8 सीटों—4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों—पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इन सीटों पर भाजपा, जदयू, राजद और कांग्रेस के साथ जन सुराज और आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। ऐसे में मुकाबला कई सीटों पर बहुकोणीय हो गया है।

इन 8 सीटों का दायरा बिहार के करीब 30 जिलों और लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों तक फैला हुआ है। हालांकि, इन सीटों के चुनाव में आम मतदाता वोट नहीं करते। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची होती है और इन्हीं विशेष मतदाताओं के वोट से विधान परिषद के सदस्य चुने जाते हैं।

कौन कर सकता है मतदान?

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वही व्यक्ति मतदाता बन सकता है, जो कम से कम तीन वर्ष पहले स्नातक की डिग्री हासिल कर चुका हो और निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-19 भरकर मतदाता के रूप में पंजीकृत हो। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में माध्यमिक विद्यालय या उससे ऊपर के शिक्षण संस्थानों में कम से कम तीन वर्षों से कार्यरत शिक्षक मतदाता बन सकते हैं। इसके लिए फॉर्म-20 के जरिए पंजीकरण कराया जाता है।

1. पटना स्नातक सीट

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना के साथ नालंदा और नवादा जिले शामिल हैं। इसके तहत कुल 25 विधानसभा क्षेत्र आते हैं और करीब 88 हजार मतदाता पंजीकृत हैं। इस सीट पर जदयू के निवर्तमान MLC नीरज कुमार लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं और चौथी बार मैदान में हैं। इस बार उनका प्रमुख मुकाबला जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह से माना जा रहा है। अनुज सिंह को जदयू विधायक अनंत सिंह का समर्थन हासिल है। इसके अलावा राजद से दिलीप कुमार, कांग्रेस से डॉ. असदुल्लाह खान और आम आदमी पार्टी से हिमांशु पटेल भी चुनावी मैदान में हैं।

2. दरभंगा स्नातक सीट

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले शामिल हैं। यहां 37 विधानसभा क्षेत्र आते हैं और करीब 1.15 लाख मतदाता हैं। एनडीए के उम्मीदवार और निवर्तमान विधान पार्षद सर्वेश कुमार के सामने राजद के अनिल कुमार झा, कांग्रेस के रजनीकांत पाठक और जन सुराज के डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी चुनौती पेश कर रहे हैं।

3. तिरहुत स्नातक सीट

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर के 28 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस सीट पर करीब 1.50 लाख स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। यहां जदयू के अभिषेक झा, राजद की डॉ. रश्मि विनायक गौतम और आम आदमी पार्टी के ऋषि अग्रवाल प्रमुख उम्मीदवारों में हैं।

4. कोसी स्नातक सीट

कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। इसमें 14 जिले और 64 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। करीब 1.20 लाख मतदाता इस सीट पर वोट करेंगे। एनडीए की ओर से भाजपा के निवर्तमान MLC डॉ. एन.के. यादव मैदान में हैं। उनके सामने राजद के नितेश कुमार यादव, कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल और जन सुराज के डॉ. रजनीश रंजन हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी कड़ा मुकाबला

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में करीब 16,600 मतदाता हैं। यहां भाजपा के निवर्तमान MLC प्रो. नवल किशोर यादव, राजद के डॉ. संजीव कुमार सिंह, कांग्रेस के संजय कुमार यादव और जन सुराज की डॉ. दिव्या ज्योति मैदान में हैं।दरभंगा शिक्षक सीट पर करीब 8,900 शिक्षक मतदाता हैं। जदयू के घनश्याम राय, कांग्रेस के निवर्तमान MLC डॉ. मदन मोहन झा, राजद के कुमार राय और आम आदमी पार्टी के शंभूनाथ ठाकुर के बीच मुकाबला है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सारण, सीवान और गोपालगंज शामिल हैं। करीब 10,800 मतदाता यहां वोट करेंगे। जदयू के आनंद पुष्कर, राजद के प्रो. जयराम यादव और जन सुराज के निवर्तमान MLC आफाक अहमद प्रमुख प्रत्याशी हैं।वहीं, तिरहुत शिक्षक सीट पर करीब 9 हजार शिक्षक मतदाता हैं। CPI के निवर्तमान MLC संजय कुमार के सामने एनडीए प्रत्याशी और जन सुराज के भूषण झा प्रमुख चुनौती हैं।

क्या है MLC चुनाव में जीत का गणित?

विधान परिषद की इन सीटों पर चुनाव सामान्य बहुमत के आधार पर नहीं होता। यहां आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत यानी Single Transferable Vote (STV) का इस्तेमाल किया जाता है।मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को 1, 2, 3 जैसी वरीयता देते हैं। पहले चरण में सभी उम्मीदवारों को पहली वरीयता के वोटों की गिनती होती है।

यदि किसी उम्मीदवार को निर्धारित जीत का कोटा हासिल हो जाता है तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। यदि कोई उम्मीदवार पहली वरीयता में जीत का कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशी को बाहर कर दिया जाता है। उसके मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता के वोट बाकी उम्मीदवारों को ट्रांसफर किए जाते हैं।

इसके बाद जरूरत पड़ने पर अगला सबसे कम वोट पाने वाला उम्मीदवार बाहर होता है और उसके वोटों की अगली वरीयता के अनुसार गणना होती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक कोई उम्मीदवार जीत का आवश्यक कोटा हासिल नहीं कर लेता।

यानी इन चुनावों में सिर्फ पहली पसंद के वोट ही निर्णायक नहीं होते। दूसरी और तीसरी वरीयता के वोट भी उम्मीदवार की जीत-हार का पूरा समीकरण बदल सकते हैं। यही वजह है कि बिहार की इन 8 MLC सीटों पर इस बार राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय और नए राजनीतिक दलों के उम्मीदवार भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ रहे हैं।