DARBHANGA: केंद्र की मोदी सरकार भले ही यह दावा करे कि लालू राज के कथित ‘जंगलराज’ में सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर चलती थीं, लेकिन दरभंगा में मनरेगा योजना को लेकर सामने आया मामला अब ‘रामराज’में भी कागजों पर विकास के दावे पर सवाल खड़े कर रहा है।
ताजा मामला दरभंगा के बिरौल प्रखंड के रोहर महमूदा पंचायत का है, जहां मनरेगा योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता बबलू यादव ने आरोप लगाया है कि पंचायत में कई मनरेगा योजनाओं में बिना धरातल पर काम कराए ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई और कागजों में कार्य को पूर्ण दिखा दिया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जिन स्थानों पर मिट्टी भराई और खड़ंजा निर्माण दिखाया गया है, वहां मौके पर काम के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मनरेगा योजनाओं में कथित धांधली को लेकर शिकायत की थी।
आरोप है कि बिरौल के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) ने बिना वास्तविक स्थल जांच किए ही एक रिपोर्ट विभाग को सौंप दी, जिसके आधार पर शिकायत को बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रिपोर्ट में धरातल की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया गया। अगर मौके पर जाकर जांच की जाए तो कागजों और जमीन पर हुए काम के बीच का अंतर सामने आ सकता है।
मामले को लेकर आवेदक ने दोबारा बिहार सरकार के ‘सहयोग पोर्टल’ पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत को उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पास अग्रसारित किया गया है। उन्होंने मांग की है कि बिरौल पीओ द्वारा पूर्व में दी गई रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा की जाए और जिला स्तर से स्वतंत्र जांच टीम भेजकर योजनाओं की भौतिक जांच कराई जाए।
साथ ही, यदि बिना काम कराए सरकारी राशि की निकासी और गबन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के साथ-साथ गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि मनरेगा की योजनाएं जमीन पर चलीं या सिर्फ सरकारी फाइलों में? शिकायत के बाद जिला प्रशासन की जांच में क्या सच सामने आता है, यह देखने वाली बात होगी।
दरभंगा से गिरिश कुमार की रिपोर्ट












