पटना : बिहार के चर्चित NEET छात्रा मौत कांड में करीब आठ महीने की जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पटना की पॉक्सो विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। CBI की जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक ठोस साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के बाद अब मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर गहरी निराशा जताते हुए शुरुआती जांच में हुई कथित चूकों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि NEET छात्रा की मौत के मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट बेहद निराशाजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच के शुरुआती दौर में जिन महत्वपूर्ण पहलुओं और साक्ष्यों पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए था, उन्हें आखिर क्यों नजरअंदाज किया गया। उनका कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट या कमजोर हो गया, तो यह महज जांच की कमी नहीं, बल्कि न्याय की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर असर डालने वाली बात है।
'शुरुआती जांच की चूक की भी हो समीक्षा'
HAM (से.) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि अब जरूरत केवल CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर चर्चा करने की नहीं, बल्कि मामले की शुरुआती जांच में हुई चूकों की भी निष्पक्ष समीक्षा करने की है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही प्रमाणित होती है, उनकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि एक बेटी की मौत का सच सामने नहीं आ पाना और उसके परिवार का न्याय से वंचित रह जाना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय का तकाजा है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही के कारण जांच प्रभावित हुई है तो उसकी भी जवाबदेही तय हो।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी 2026 को छात्रा हॉस्टल में बेहोश मिली थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
छात्रा के पिता के फर्दबयान के आधार पर 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। परिजनों ने छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने और उसके साथ यौन हिंसा की आशंका जताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के बाद पटना में लगातार विरोध-प्रदर्शन हुए और जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए।
मामले की शुरुआती पुलिस जांच भी विवादों में रही। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद यौन हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल सामने आए। इसी क्रम में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म के साक्ष्य मिलने की बात जांच में सामने आई और DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई।
12 फरवरी को CBI ने संभाली थी जांच
बिहार पुलिस की जांच के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI से कराने की अनुशंसा की थी। इसके बाद 12 फरवरी को CBI ने केस टेकओवर किया। जांच एजेंसी की टीम ने हॉस्टल पहुंचकर घटनास्थल और कमरे की पड़ताल की। दस्तावेज, कपड़े और अन्य सामान को भी जांच के लिए कब्जे में लिया गया। हॉस्टल से जुड़े लोगों और मामले से संबंधित अन्य व्यक्तियों से पूछताछ भी की गई। करीब आठ महीने की जांच के बाद अब CBI ने पटना स्थित पॉक्सो की विशेष अदालत में अंतिम प्रपत्र यानी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। एजेंसी के मुताबिक किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं।
13 अक्टूबर को होगी अहम सुनवाई
पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है। इस दौरान पीड़ित परिवार का पक्ष भी सुना जाएगा। CBI की रिपोर्ट को स्वीकार करना है या नहीं, अथवा मामले में आगे की जांच का रास्ता खोलना है, इसका अंतिम फैसला अदालत करेगी। ऐसे में श्याम सुन्दर शरण की मांग के बाद अब इस मामले में शुरुआती जांच की भूमिका, कथित लापरवाही और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को लेकर सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं। मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।





