ब्रेकिंग
बिहार में शिक्षकों के तबादले पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, यूपी के टीचर के साथ नहीं होगा भेदभाव17 वर्षीय डाक कांवड़िये की मौत, सीने में दर्द के बाद जमीन पर गिरा, हार्ट अटैक की आशंकाबांका के कार्यपालक अभियंता हरेन्द्र कुमार के खिलाफ SVU की बड़ी कार्रवाई, आय से अधिक संपत्ति का खुलासानवादा में वज्रपात का कहर, ठनका गिरने से 3 लोगों की दर्दनाक मौतNEET छात्रा हत्याकांड: न्याय की मांग को लेकर बिहार लोक भवन पहुंचे परिजन, राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहारबिहार में शिक्षकों के तबादले पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, यूपी के टीचर के साथ नहीं होगा भेदभाव17 वर्षीय डाक कांवड़िये की मौत, सीने में दर्द के बाद जमीन पर गिरा, हार्ट अटैक की आशंकाबांका के कार्यपालक अभियंता हरेन्द्र कुमार के खिलाफ SVU की बड़ी कार्रवाई, आय से अधिक संपत्ति का खुलासानवादा में वज्रपात का कहर, ठनका गिरने से 3 लोगों की दर्दनाक मौतNEET छात्रा हत्याकांड: न्याय की मांग को लेकर बिहार लोक भवन पहुंचे परिजन, राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहार

Bihar Bhumi: CO-DCLR की मनमानी पर चला हथौड़ा....‘लंबित’ के नाम पर खेल खत्म ! राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का मास्टर स्ट्रोक

जमीन के दाखिल-खारिज और भूमि विवाद मामलों को ‘लंबित’ बताकर लटकाने की प्रवृत्ति पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने स्पष्ट किया है कि केवल स्टे ऑर्डर (Temporary Injunction) वाले मामले ही लंबित माने जाएंगे।

Bihar Bhumi, बिहार भूमि विवाद, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, सी.के. अनिल, विजय कुमार सिन्हा, दाखिल खारिज, स्टे ऑर्डर, लंबित मामले, समाहर्ता निर्देश, DCLR आदेश, बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009, सा
Viveka Nand
3 मिनट

Bihar Bhumi: बिहार में लंबित का बड़ा खेल चलता है. राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी लंबित का बहाना बनाकर जमीन का दाखिल खारिज व अन्य कार्य लटका देते हैं. जिससे रैयतों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में सरकार ने एक बार स्थिति स्पष्ट करते हुए सभी समाहर्ताओं,डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने साफ कर दिया है कि स्टे ऑर्डर वाले मामले ही लंबित माने जाएंगे. 

सक्षम न्यायालय से स्टे ऑर्डर को ही लंबित माना जायेगा...

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 एवं नियमावली, 2010 के अंतर्गत ‘लंबित’ मामलों की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं एवं उप समाहर्ताओं (भूमि सुधार) को वादों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया है।प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सभी वादों का निष्पादन तीन माह के भीतर करना अनिवार्य है। ‘लंबित’ का अर्थ केवल वही मामले होंगे, जिनमें सक्षम न्यायालय द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा (Stay Order/Temporary Injunction) जारी हो।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम प्राधिकार एवं अपीलीय प्राधिकार को मामलों का निष्पादन संक्षिप्त प्रक्रिया (Summary Disposal) के तहत करना है। समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर अधिकतम तीन माह के भीतर वादों के निष्पादन को सुनिश्चित करें।

उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भूमि विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। भूमि विवाद के मामलों का त्वरित गति से निष्पादन के उद्देश्य से लंबित की परिभाषा स्पष्ट की गई है। यह पहल माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के सात निश्चय कार्यक्रम (2025-30) के अंतर्गत ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




रिपोर्टिंग
V

रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता