Bihar News : बिहार विधानसभा का मानसून सत्र इस बार कई मायनों में खास रहने वाला है। 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलने वाले पांच दिवसीय सत्र में पहली बार विधायकों के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। अब विधायक शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों की सूचनाएं ऑनलाइन भेज सकेंगे। विधानसभा सचिवालय का मानना है कि इससे सदन की कार्यवाही अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध होगी, साथ ही जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में आसान हो जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत विधानसभा ने ऑनलाइन सूचना देने के लिए समय भी निर्धारित कर दिया है। विधायक प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 9 बजे तक शून्यकाल की सूचना ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद सुबह 9 बजे से 10 बजे तक ध्यानाकर्षण प्रस्तावों की ऑनलाइन सूचना स्वीकार की जाएगी। यह पहली बार होगा जब सदन की कार्यवाही से जुड़ी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
विधानसभा सचिवालय के अनुसार इस पहल का उद्देश्य विधायकों को तकनीक आधारित सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि कागजी प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो और सूचनाओं के निस्तारण में पारदर्शिता बनी रहे। ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से सूचनाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और उनकी निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। इससे सदन में उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों का बेहतर प्रबंधन होने की उम्मीद है।
अनुपूरक बजट और कई अहम विधेयक होंगे पेश
मानसून सत्र के दौरान सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट भी विधानसभा में पेश करेगी। इसके अलावा सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 और 22 जुलाई को विभिन्न विभागों से जुड़े विधेयक पेश किए जाएंगे। वहीं 23 जुलाई को प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी और उसके बाद सदन में मतदान कराया जाएगा। सरकार की ओर से लाए जाने वाले विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना है। ऐसे में इस बार का मानसून सत्र विधायी गतिविधियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सर्वदलीय बैठक में सुचारु संचालन पर जोर
सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। अध्यक्ष ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने विधायकों को सदन में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और विधायी कार्यवाही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसलिए जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, ताकि विधानसभा की कार्यवाही जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम दे सके।
कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरने की तैयारी
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के तेवर भी तीखे रहने के संकेत हैं। राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दल राज्य में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुके हैं।
विपक्ष भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर सहित अन्य चर्चित घटनाओं पर सरकार से जवाब मांग सकता है। इसके अलावा अपराध, प्रशासनिक व्यवस्था और जनसरोकार से जुड़े कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सदन के भीतर राजनीतिक गर्माहट देखने को मिल सकती है।
विधानसभा परिसर में रहेंगे कड़े सुरक्षा इंतजाम
मानसून सत्र को देखते हुए विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक सख्त की जा रही है। सभी प्रवेश द्वारों पर आधुनिक बैगेज स्कैनर और वाहन जांच उपकरण लगाए जाएंगे। मेटल डिटेक्टर के साथ प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति, उसके सामान तथा वाहन की गहन जांच की जाएगी।
विधानसभा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति किसी भी बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति को परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए अलग-अलग रंग और सीरियल नंबर वाले विशेष पास जारी किए जाएंगे। पास की जांच के बाद ही संबंधित व्यक्ति को परिसर में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।
तकनीक और सुरक्षा के साथ शुरू होगा नया सत्र
इस बार का मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल व्यवस्था और आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन के कारण भी चर्चा में रहेगा। ऑनलाइन सूचना प्रणाली लागू होने से विधायकों को नई सुविधा मिलेगी, जबकि सख्त सुरक्षा व्यवस्था के जरिए सदन की कार्यवाही को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे और अनुपूरक बजट को पारित कराने पर ध्यान देगी, वहीं विपक्ष कानून-व्यवस्था और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। ऐसे में 20 से 24 जुलाई तक चलने वाला यह मानसून सत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।





