Bihar News: बिहार के सरकारी अस्पतालों की बदहाली दूर होती नहीं दिख रही है। ताजा तस्वीर भोजपुर के कोईलवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से आई है, जो सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। यहां सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज का इलाज प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की बजाय गैर-प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा किए जाने का मामला उजागर हुआ है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार की शाम कोईलवर-बबुरा फोरलेन पर जमालपुर के पास सड़क दुर्घटना में दौलतपुर निवासी एक अधेड़ व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल कोईलवर CHC लाया गया।
इसी दौरान प्राथमिक उपचार के समय का एक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल में जनरेटर ऑपरेटर, मरीजों के भोजन से जुड़े ठेकेदार का स्टाफ और एक आउटसोर्सिंग सुपरवाइजर घायल व्यक्ति को टांका लगा रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उसी समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और एएनएम पास में खड़े नजर आए, लेकिन उन्होंने खुद इलाज करने के बजाय यह जिम्मेदारी गैर-प्रशिक्षित लोगों को सौंप दी। वीडियो सामने आते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया हालांकि फर्स्ट बिहार वायरल वीडियो और फोटो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में एएनएम, जीएनएम और अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मौजूद होने के बावजूद इस तरह का संवेदनशील कार्य बाहरी कर्मियों से कराना गंभीर लापरवाही है। यह न केवल चिकित्सा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ भी है।
इस पूरे मामले में CHC प्रभारी डॉ. उमेश कुमार की कार्यशैली और निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी लापरवाही और ढीली व्यवस्था के कारण ही अस्पताल में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
वहीं, इस संबंध में भोजपुर के प्रभारी सिविल सर्जन संजय सिन्हा ने दूरभाष पर बताया कि पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि कोईलवर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से इस घटना के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि आखिर किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ।
रिपोर्ट- राकेश कुमार, आरा

