1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 05 Jan 2026 01:07:02 PM IST
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Bhoomi Jan Samvad : बिहार में जमीन मापी और जमीन माफी को लेकर अक्सर विवादों का सामना करना पड़ता है, लेकिन आज भागलपुर में आयोजित भूमि एवं जन संवाद कार्यक्रम में यह मुद्दा फिर से उजागर हुआ। कार्यक्रम के दौरान एक फरियादी ने डीसीएलआर और अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी कि उन्होंने जमीन माफी के लिए 3,000 रुपये जमा कर दिए हैं और विभाग की तरफ से संबंधित आदेश भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद अमीन ने उनकी जमीन की मापी नहीं करवाई।
मौके पर उपस्थित अधिकारियों और जनता के सामने फरियादी ने स्पष्ट किया कि जमीन माफी का पैसा जमा करने और आदेश जारी होने के बाद भी अमीन द्वारा जमीन की मापी नहीं की जा रही है। इस पर कार्यक्रम में मौजूद प्रधान सचिव, सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी हैरान रह गए। यह मामला बिहार में भूमि मापी और जमीन माफी के प्रक्रिया में मौजूद खामियों को सामने लाने वाला बन गया।
इस पर मौके पर मौजूद सचिव गोपाल मीणा ने संबंधित अंचलाधिकारी से जवाब तलब किया। अंचलाधिकारी ने माना कि फरियादी की शिकायत सही है, लेकिन उन्होंने कहा कि यह मामला डीसीएलआर के अधीन है और इस पर उनका सीधे तौर पर हस्तक्षेप करना संभव नहीं है। इससे साफ जाहिर हुआ कि जमीन मापी और माफी के मामलों में प्रशासनिक जटिलताएं और विभागीय जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन भी जनता के लिए परेशानी का कारण बनता है।
इसके बाद डीसीएलआर सचिन ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप किया और फरियादी की जमीन की मापी करवाने का आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि चूंकि जमीन माफी का पैसा जमा हो चुका है और आदेश विभाग की तरफ से भी जारी किया जा चुका है, इसलिए अब इसे अमीन के द्वारा लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन मापी तुरंत करवाई जाए और फरियादी को इसका समाधान दिया जाए।
भूमि एवं जन संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य ही जनता की समस्याओं को सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने का रवैया लोगों का भरोसा विभाग पर कम कर देता है। भागलपुर के इस कार्यक्रम में यह स्पष्ट हो गया कि जमीन मापी और माफी के मामलों में जनता को अक्सर लंबा इंतजार करना पड़ता है, और अगर अधिकारी समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो जनता को न्याय पाने के लिए अधिकारियों के सामने सीधे आना पड़ता है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी जाहिर होता है कि विभागीय प्रक्रिया और आदेश के बावजूद, जमीन मापी जैसे मूलभूत कार्यों में विलंब प्रशासनिक ढांचागत कमियों और जिम्मेदारियों की अस्पष्टता के कारण होता है। डीसीएलआर और प्रधान सचिव का सीधे हस्तक्षेप इस मामले में त्वरित समाधान के लिए अहम साबित हुआ।
भागलपुर में हुए भूमि एवं जन संवाद कार्यक्रम ने फिर यह साबित कर दिया कि जब तक जनता अपनी आवाज नहीं उठाएगी और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी नहीं होगी, तब तक जमीन माफी और मापी जैसे मामलों में देरी और विवाद बने रहेंगे। अधिकारियों द्वारा तुरंत कार्रवाई और फरियादी की समस्या का समाधान, इस प्रकार के कार्यक्रमों की महत्ता को दर्शाता है।
इस घटना ने यह भी संदेश दिया कि जमीन मापी और माफी के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही का होना कितना जरूरी है। अगर विभागीय आदेश और जनता की मेहनत के बावजूद जमीन मापी नहीं करवाई जाती, तो यह केवल जनता की परेशानियों को बढ़ाता है और प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल उठाता है।
भागलपुर की जनता के लिए यह घटना चेतावनी और उम्मीद दोनों है। चेतावनी इसलिए कि प्रशासनिक ढांचे में सुधार की आवश्यकता है और उम्मीद इसलिए कि उचित हस्तक्षेप और संज्ञान लेने पर समस्याओं का समाधान संभव है। भूमि एवं जन संवाद कार्यक्रम जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होते हैं।