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कद छोटा लेकिन हौसले आसमान से ऊंचे! वायरल वीडियो से चर्चा में आए 42 इंच के शिक्षक गौतम कुमार

बेगूसराय के 42 इंच लंबे शिक्षक गौतम कुमार अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और शिक्षा के दम पर मिसाल पेश कर रहे हैं। ट्रेनिंग कॉलेज में सीनियर लेक्चरर के रूप में कार्यरत गौतम का मतदान केंद्र पर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बिहार न्यूज
कद छोटा लेकिन हौसले आसमान से ऊंचे!
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
8 मिनट

BEGUSARAI: बेगूसराय के गौतम कुमार शारीरिक बनावट को पीछे छोड़ शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज ट्रेनिंग कॉलेज में भावी शिक्षकों को वो शिक्षा दे रहे हैं। 23 अक्टूबर को दिनकर भवन में मतदान करने पहुंचे शिक्षक गौतम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल


बेगूसराय: “हां, मैं सच में बौना हूं… इसे मैं स्वीकार करता हूं।” ये शब्द हैं बेगूसराय के शिक्षक गौतम कुमार के, जिनकी शारीरिक लंबाई महज 42 इंच यानी 3 फीट 6 इंच है। लेकिन उनके हौसले, आत्मविश्वास और उपलब्धियों की कहानी किसी के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। शारीरिक बनावट को अपनी कमजोरी नहीं बनने देने वाले गौतम कुमार आज शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। 


वे ट्रेनिंग कॉलेज में सीनियर लेक्चरर के रूप में भावी शिक्षकों को पढ़ा रहे हैं और उनके भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 23 अक्टूबर को बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में बेगूसराय के दिनकर भवन स्थित मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचे गौतम कुमार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, उनकी पहचान महज वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। उनके पीछे शिक्षा, संघर्ष, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की एक लंबी कहानी है।


42 इंच के गौतम कुमार ने अपने शब्दों से जीता लोगों का दिल


गौतम कुमार की चर्चा उस समय तेज हो गई, जब 23 अक्टूबर को मतदान के दौरान उनका वीडियो सामने आया। मतदान केंद्र पर उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। वीडियो देखने वाले लोगों के सामने उनकी शारीरिक बनावट तो आई, लेकिन उनके व्यक्तित्व की असली ऊंचाई को समझने के लिए उनकी जिंदगी के संघर्ष और उपलब्धियों को जानना भी जरूरी है। गौतम कुमार का जन्म 1983 में हुआ था और करीब 42 वर्ष के हैं...


गौतम कुमार अपनी शारीरिक बनावट को लेकर किसी तरह का दिखावा नहीं करते। वे अपनी वास्तविकता को स्वीकार करते हैं और अपनी पहचान को अपनी योग्यता, ज्ञान और कर्म से जोड़कर देखते हैं। उनका नजरिया बताता है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट उसके व्यक्तित्व और प्रतिभा का पैमाना नहीं हो सकती।


“मैं सच में बौना हूं, लेकिन मेरी आंतरिक भावनाओं की लंबाई कहीं ज्यादा ऊंची है”


अपनी शारीरिक बनावट और जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए गौतम कुमार ने कहा कि प्रकृति ने हर इंसान को अलग बनाया है। किसी की शारीरिक बनावट के आधार पर उसकी प्रतिभा, क्षमता और व्यक्तित्व का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।


उन्होंने बताया कि जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जब लोग उन्हें देखकर मुस्कुराते हैं, बच्चे उन्हें देखकर अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं या कुछ लोग दूसरों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित करते हैं। हालांकि, उन्होंने इन परिस्थितियों को अपनी जिंदगी पर हावी नहीं होने दिया और लगातार आगे बढ़ते रहे।


गौतम कुमार के शब्दों में, “परमात्मा ने जो भी बनाया, मुझे मेरे मालिक तूने बहुत कुछ दिया है। तेरा शुक्रिया, तेरा शुक्रिया।”


उनके इन शब्दों में अपनी शारीरिक स्थिति को स्वीकार करने के साथ-साथ जीवन के प्रति आभार, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास की झलक मिलती है। वे अपनी शारीरिक बनावट को छिपाने के बजाय उसे सहजता से स्वीकार करते हैं और अपनी उपलब्धियों के दम पर आगे बढ़ते हैं।


शारीरिक चुनौतियों के बीच शिक्षा को बनाया सबसे बड़ी ताकत


बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर प्रखंड अंतर्गत विक्रमपुर गांव के निवासी गौतम कुमार ने बचपन से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना किया। इसके बावजूद पढ़ाई के प्रति उनकी लगन और आगे बढ़ने की इच्छा कमजोर नहीं पड़ी। उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया और इसी के दम पर अपने लिए एक अलग मुकाम तैयार किया।


गौतम कुमार के मुताबिक, उन्होंने पांच विषयों में स्नातक स्तर की पढ़ाई की है। वे हिंदी ऑनर्स हैं और शिक्षा शास्त्र में पीएचडी भी कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने दो एमएमए डिग्रियां होने की जानकारी दी है।


फिलहाल वे विष्णुपुर स्थित टीचर ट्रेनिंग स्कूल में सीनियर लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे प्रभारी वाइस प्रिंसिपल की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उनके अनुसार, उनके विद्यार्थी भी आगे बढ़कर व्याख्याता बन चुके हैं।


यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि शारीरिक परिस्थितियां किसी व्यक्ति की मेहनत, ज्ञान और आगे बढ़ने की क्षमता को सीमित नहीं कर सकतीं।


शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के हित में किया मतदान


गौतम कुमार 23 अक्टूबर को केवल एक मतदाता के रूप में मतदान केंद्र नहीं पहुंचे थे, बल्कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण भी मानते हैं। उन्होंने बेगूसराय के दिनकर भवन स्थित मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।


उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शैक्षणिक प्रशासन को बेहतर बनाने और बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए योग्य प्रतिनिधि का चुनाव जरूरी है।


उनके अनुसार, विधान परिषद में ऐसा प्रतिनिधि होना चाहिए, जो शिक्षकों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और शैक्षणिक जगत की अपेक्षाओं को प्रभावी ढंग से उठाए। इसी सोच के साथ उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी निभाई।


अच्छे वक्ता भी हैं गौतम कुमार, प्रशासनिक कार्यक्रमों में कर चुके हैं मंच संचालन


गौतम कुमार की पहचान केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है। वे अच्छे वक्ता भी हैं और जिला प्रशासन के कई कार्यक्रमों में मंच संचालन कर चुके हैं। उनकी वाकपटुता, आत्मविश्वास और विषयों पर पकड़ उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा है।


वे मानते हैं कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली रील किसी व्यक्ति की जिंदगी का महज कुछ सेकंड का हिस्सा होती है। जबकि वास्तविक जीवन में संघर्ष, मेहनत, अनुभव और उपलब्धियों की लंबी यात्रा होती है। किसी व्यक्ति को केवल कुछ सेकंड के वीडियो के आधार पर समझना आसान नहीं है।


उनकी कहानी भी यही संदेश देती है। वायरल वीडियो में लोगों का ध्यान उनकी शारीरिक बनावट पर गया, लेकिन उसके पीछे छिपी शैक्षणिक यात्रा, मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों को समझने के लिए उनके जीवन के व्यापक पहलुओं को जानना जरूरी है।


कद छोटा, लेकिन सोच और हौसले की ऊंचाई बड़ी


बेगूसराय के शिक्षक गौतम कुमार की कहानी आत्मसम्मान, शिक्षा और इच्छाशक्ति का संदेश देती है। उन्होंने अपनी शारीरिक बनावट को स्वीकार किया, लेकिन उसे अपनी पहचान की सीमा नहीं बनने दिया। आज वे विद्यार्थियों को शिक्षित कर रहे हैं, भावी शिक्षकों को दिशा दे रहे हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।


42 इंच की शारीरिक लंबाई वाले गौतम कुमार की उपलब्धियां उन लोगों के लिए भी एक संदेश हैं, जो परिस्थितियों को अपनी राह की सबसे बड़ी बाधा मान लेते हैं। उनकी जिंदगी बताती है कि चुनौतियां चाहे जैसी हों, मजबूत इच्छाशक्ति, शिक्षा और निरंतर मेहनत के दम पर आगे बढ़ा जा सकता है।


गौतम कुमार की कहानी का सार यही है—इंसान की असली ऊंचाई उसके कद से नहीं, बल्कि उसकी सोच, ज्ञान, कर्म और हौसले से तय होती है।

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