Bihar Education News: बिहार में शैक्षणिक भवनों और विद्यालयों के निर्माण कार्यों में लापरवाही तथा लेटलतीफी बरतने वाले संवेदकों पर बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम (BSEIDC) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। निर्धारित समयावधि में कार्य पूरा नहीं करने और गुणवत्ता में उदासीनता बरतने वाले कई संवेदकों के अनुबंध रद्द किए जा रहे हैं, जबकि कई अन्य को ब्लैकलिस्ट कर डिबार करने और भारी जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कई संवेदक डिबार कइयों को नोटिस जारी
विभागीय सूत्रों की माने, तो नवादा, नालंदा, किशनगंज, मधेपुरा और गयाजी आदि जिलों में 10+2 स्तर के विद्यालयों तथा छात्रावास भवनों के निर्माण में अत्यधिक शिथिलता पाई गई। कार्यपालक अभियंता और DMT की अनुशंसा के आधार पर नवादा के कौवाकोल प्रखंड में नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास के अधूरे निर्माण के लिए संवेदक राजेश कुमार को डिबार किया गया है। नालंदा के हरनौत में +2 उच्च विद्यालय भवन के अपूर्ण कार्य को लेकर कुमार सरोज तथा अन्य परियोजनाओं में चितरंजन कुमार शर्मा, अविशाक कुमार, अमित कुमार सिंह और अमित रंजन पर डिबार अथवा कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई है।
पुराने अनुबंधों को रद्द करने की सिफारिश
वहीं, अररिया, शेखपुरा, लखीसराय, कटिहार, शिवहर और किशनगंज सहित अन्य जिलों में वर्षों से लटके निर्माण कार्यों के अनुबंध रद्द किए जाने की प्रक्रिया तेजी पर है। इनमें रिद्धि कंस्ट्रक्शन (अररिया), मेसर्स कादंबिनी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड (शेखपुरा), विजय कुमार (लखीसराय), गोपाल कुमार (कटिहार), मेसर्स प्रमोद कंस्ट्रक्शन (नवादा) और विनीत झा (किशनगंज शिक्षा भवन कार्य) जैसे संवेदक शामिल हैं, जहां अपूर्ण कार्यों को लेकर अनुबंध विखंडन और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
जुर्माना और ईएमडी जब्त
समय पर परियोजना पूरी न करने वाले निम्न संवेदकों पर 1% की दर से हर्जाना लगाया गया है:
• मेसर्स हरिओम कंस्ट्रक्शन: 28.42 लाख
• मेसर्स अध्याय इंजीकॉन प्राइवेट लिमिटेड: 16.30 लाख
• मेसर्स अक्षित इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड: 15.80 लाख
• एम. के. गुप्ता: 11.36 लाख
• अजय कुमार: 1.45 लाख
इसके अलावा, गंभीर अनियमितता के चलते शिवांगी कंस्ट्रक्शन का कार्यादेश रद्द करते हुए उसकी जमानत राशि जब्त कर ली गई है। विभाग के इस कड़े कदम से निर्माण क्षेत्र से जुड़े संवेदकों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




