1st Bihar Published by: First Bihar Updated Dec 16, 2025, 11:09:21 AM
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Bihar News: 'गुटखा खा रहे हैं तो क्या कर लोगे? बताओ, क्या कर लोगे? हम गुटखा खा रहे हैं तो तुम्हारे बाप का क्या जाता है?' बिहार के औरंगाबाद सदर अस्पताल से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के ओपीडी ऑफिस में तैनात एक डॉक्टर खुलेआम गुटखा चबाते हुए मरीजों की जांच कर रहा था। साथ ही डॉक्टर न तो मास्क पहने था और न ही स्वच्छता के किसी नियम का पालन कर रहा था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस घटना से साफ पता चलता है कि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था काफी बदहाल स्थिति में है और अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है।
दरअसल, वायरल वीडियो में वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि अस्पताल के ओपीडी कक्ष में डॉक्टर मुंह में गुटखा दबाए हुए है और उसी हालत में वो मरीजों की जांच कर रहा है। जब एक मरीज के परिजन ने डॉक्टर के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर आपत्ति जताई, तो डॉक्टर भड़क गया। डॉक्टर की प्रतिक्रिया और भी ज्यादा शर्मनाक थी, उसने मरीज के परिजन से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि तुम्हारे बाप का क्या जाता है, क्या कर लोगे? हालांकि इस वायरल वीडियो की पुष्टि
गुटखा खाकर मरीजों की जांच करना न केवल अस्वच्छ है, बल्कि यह मेडिकल एथिक्स का भी गंभीर उल्लंघन है। कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य कर्मचारियों को स्वच्छता और मास्क पहनने के नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया था, लेकिन वीडियो में यह नियम पूरी तरह नज़रअंदाज किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सदर अस्पताल में डॉक्टरों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की पहली घटना नहीं है, लेकिन इससे पहले शिकायतों को दबा दिया जाता था।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि यदि शहर के मुख्य अस्पताल में यह हाल है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर क्या होगा। वीडियो के पुख्ता सबूत के चलते स्थानीय नागरिकों ने दोषी डॉक्टर के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
ऐसे मामलों से सार्वजनिक विश्वास को बड़ा नुकसान पहुंचता है और जनता की स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा कम होता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके अस्पतालों में स्वच्छता और नैतिक मानकों को सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और सुधार के लिए डिजिटल शिकायत प्रणाली और नियमित ऑडिट की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई हो सके।