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नीतीश सरकार के शराबबंदी कानून से न्यायपालिका का फूल रहा दम : दो लाख से ज्यादा मामले लंबित, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

PATNA : बिहार में लागू किए गए शराबबंदी कानून की वजह से न्यायपालिका का दम फूल रहा है। दरअसल शराबबंदी कानून के तहत बिहार में जो मामले दर्ज किए जा रहे हैं उसकी कानूनी प्रक्रिया का बोझ न्

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PATNA : बिहार में लागू किए गए शराबबंदी कानून की वजह से न्यायपालिका का दम फूल रहा है। दरअसल शराबबंदी कानून के तहत बिहार में जो मामले दर्ज किए जा रहे हैं उसकी कानूनी प्रक्रिया का बोझ न्यायपालिका के ऊपर पड़ रहा है। देशभर के न्यायालयों में पहले से ही काम का अत्यधिक दबाव है, ऊपर से शराबबंदी कानून ने बिहार में न्यायपालिका पर काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में शराबबंदी कानून के तहत दर्ज दो लाख से ज्यादा मामले राज्य भर के अदालतों में लंबित है। पटना हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और रजिस्ट्रार जनरल से जवाब तलब किया है। इस मामले मे आज की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधीर सिंह एवम न्यायमूर्ति डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने स्वतः दायर हुई एक पीआईएल पर किया है. पटना हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को होगी। शराबबंदी कानून के तहत बिहार की अदालतों में जो मामले लंबित हैं उनके आंकड़े आपको चौंका सकते हैं। शराबबंदी से जुड़े सबसे ज्यादा मामले पटना में लंबित हैं। पटना में कुल 28593 मामले लंबित है, अबतक केवल 11 मामलों का निपटारा किया जा सका है। लंबित मामलों की सूची में गया दूसरे स्थान पर है जहां 11211 केस लंबित हैं। मोतिहारी में 9979, कटिहार में 8667, सासाराम में 8167, बेतिया में 7881, छपरा में 7344, समस्तीपुर में 6978, मुजफ्फरपुर में 6834, नवादा में 6774, मधुबनी में 6651 शराबबंदी से जुड़े मामले लंबित हैं। जाहिर है शराबबंदी केस के तहत दर्ज हो रहे मामलों में न्यायपालिका पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ा दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी है कि 24 अक्टूबर को हाईकोर्ट जब इस मामले की सुनवाई करेगा तो बिहार सरकार की तरफ से क्या जवाब दिया जाता है।
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