Bihar Crime News: बिहार में नशे के कारोबार पर बड़ी चोट, एक करोड़ की चरस और लाखों के गांजा के साथ दो स्मगलर अरेस्ट Bihar Crime News: बिहार में नशे के कारोबार पर बड़ी चोट, एक करोड़ की चरस और लाखों के गांजा के साथ दो स्मगलर अरेस्ट Saharsa GTSE Seminar: सहरसा में जीटीएसई सेमिनार का भव्य आयोजन, विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन और प्रेरणा Saharsa GTSE Seminar: सहरसा में जीटीएसई सेमिनार का भव्य आयोजन, विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन और प्रेरणा Bihar railway news: बिहार के इन जिलों के रेल यात्रियों को बड़ी राहत, इस स्टेशन को मिला जंक्शन का दर्जा; अब डायरेक्ट पटना Bihar railway news: बिहार के इन जिलों के रेल यात्रियों को बड़ी राहत, इस स्टेशन को मिला जंक्शन का दर्जा; अब डायरेक्ट पटना Pharmacist recruitment Bihar: फार्मासिस्ट बहाली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब सिर्फ ये अभ्यर्थी ही होंगे पात्र Pharmacist recruitment Bihar: फार्मासिस्ट बहाली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब सिर्फ ये अभ्यर्थी ही होंगे पात्र World largest Shivling: बिहार में दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग की स्थापना कल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे शामिल World largest Shivling: बिहार में दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग की स्थापना कल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे शामिल
26-Aug-2025 09:35 AM
By First Bihar
Sachin Tendulkar: क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने डीआरएस (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) में ‘अंपायर कॉल’ नियम को खत्म करने की मांग उठाई है। सोमवार को सोशल मीडिया साइट रेडिट पर ‘Ask Me Anything’ सेशन के दौरान एक फैन के सवाल पर सचिन ने कहा कि खिलाड़ी ऑन-फील्ड अंपायर के फैसले से असहमत होने पर ही डीआरएस का सहारा लेते हैं, लेकिन ‘अंपायर कॉल’ नियम के कारण कई बार वही फैसला बरकरार रहता है जो तर्कसंगत नहीं है। सचिन का मानना है कि तकनीक को पूरी तरह से फैसला देना चाहिए जैसा टेनिस में होता है, जहां गेंद या तो ‘इन’ होती है या ‘आउट’। इस बयान ने क्रिकेट जगत में फिर से डीआरएस नियमों पर बहस छेड़ दी है।
‘अंपायर कॉल’ नियम तब लागू होता है, जब डीआरएस में बॉल-ट्रैकिंग तकनीक के नतीजे पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते। खासकर एलबीडब्ल्यू के मामले में अगर गेंद का 50% से कम हिस्सा स्टंप्स को छू रहा हो तो ऑन-फील्ड अंपायर का फैसला अंतिम माना जाता है। उदाहरण के लिए अगर अंपायर ने नॉट आउट दिया और बॉल-ट्रैकिंग में गेंद का आधे से कम हिस्सा स्टंप्स पर लगता दिखे तो फैसला नॉट आउट ही रहता है। वहीं, अगर अंपायर ने आउट दिया और गेंद का छोटा-सा हिस्सा भी स्टंप्स को छूता दिखे तो बल्लेबाज आउट माना जाता है। सचिन ने कहा कि यह नियम खिलाड़ियों के लिए भ्रामक है, क्योंकि डीआरएस का मकसद तकनीक के जरिए सटीक फैसला देना है न कि ऑन-फील्ड अंपायर के फैसले को प्राथमिकता देना।
सचिन ने रेडिट सेशन में कहा कि जैसे खिलाड़ियों के खराब दौर आते हैं, वैसे ही अंपायरों के भी हो सकते हैं। तकनीक भले ही 100% सटीक न हो, लेकिन वह लगातार एकसमान रहती है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर बॉल-ट्रैकिंग में गेंद स्टंप्स को जरा-सा भी छू रही हो तो बल्लेबाज को आउट दे देना चाहिए, बिना ‘अंपायर कॉल’ की जरूरत के। सचिन का तर्क है कि खिलाड़ी डीआरएस इसलिए लेते हैं क्योंकि उन्हें ऑन-फील्ड फैसले पर भरोसा नहीं होता। ऐसे में फैसला तकनीक के हवाले करना चाहिए न कि वापस उसी अंपायर के फैसले पर लौटना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब सचिन ने ‘अंपायर कॉल’ पर सवाल उठाए हैं। साल 2020 में वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा के साथ बातचीत में भी उन्होंने इस नियम को ‘खराब’ बताया था। तब उन्होंने कहा था कि अगर बॉल-ट्रैकिंग में गेंद स्टंप्स को छू रही है, चाहे थोड़ा ही क्यों न हो तो बल्लेबाज को आउट देना चाहिए। सचिन ने टेनिस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गेंद का फैसला ‘इन’ या ‘आउट’ होता है, बीच का कोई रास्ता नहीं। उनकी यह राय ICC के DRS नियमों में बदलाव की मांग को और मजबूत करती है और क्रिकेट प्रशंसकों के बीच इस पर चर्चा तेज हो गई है।