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Bihar Politics: RJD नेता मनोज झा ने सांसदों को लिखा पत्र, सभी MP से की यह खास अपील; जानिए.. पूरा मामला

राजद सांसद मनोज झा ने मनरेगा को समाप्त कर नया रोजगार विधेयक लाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने सभी सांसदों से खुले पत्र के जरिए गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस बिल के खिलाफ खड़े होने की अपील की है।

Bihar Politics

18-Dec-2025 12:35 PM

By FIRST BIHAR

Bihar Politics: राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ लाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में उन्होंने संसद के सभी सदस्यों को एक खुला पत्र लिखकर इस विधेयक का विरोध करने और गरीबों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है।


अपने पत्र की शुरुआत में मनोज झा ने महात्मा गांधी के प्रसिद्ध ‘तालिस्मान’ का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि गांधी जी हर बड़े निर्णय से पहले समाज के सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति का चेहरा याद करने और यह सोचने की सीख देते थे कि लिया गया फैसला उसके जीवन में कोई सकारात्मक बदलाव ला पाएगा या नहीं। इसी नैतिक सिद्धांत को ध्यान में रखकर उन्होंने यह पत्र लिखा है।


मनोज झा ने बताया कि 15 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार ने संसद में मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह नया रोजगार विधेयक लाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि लोकसभा में इस पर देर रात तक चर्चा जरूर हुई, लेकिन राज्यसभा में इसका विरोध किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अपील किसी राजनीतिक दल के हित में नहीं, बल्कि देश के गरीब और मजदूर वर्ग के हित में है।


राजद सांसद ने याद दिलाया कि मनरेगा कानून वर्ष 2005 में लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति से बनाया गया था। उस समय संसद ने यह स्वीकार किया था कि सम्मान के साथ काम पाने का अधिकार लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 41 में भी राज्य को बेरोजगारी की स्थिति में नागरिकों को काम और सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मनरेगा ने इस संवैधानिक भावना को कानूनी गारंटी प्रदान की थी, जबकि नया विधेयक इस गारंटी को समाप्त कर देता है।


मनोज झा ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि नए कानून के तहत 100 दिनों के बजाय 125 दिन का रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह दावा भ्रामक है, क्योंकि मनरेगा एक मांग आधारित योजना थी, जबकि नया प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी और बजट आवंटन पर निर्भर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण मनरेगा के तहत औसतन केवल 50 से 55 दिन का ही रोजगार मिल पा रहा था, तो बिना संसाधन बढ़ाए अधिक दिनों का वादा करना खोखला है।


उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे गरीबों के सम्मान और काम के अधिकार के साथ खड़े हों। मनोज झा ने कहा कि देश के सबसे गरीब नागरिक संसद के फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं और उनके भरोसे को टूटने नहीं दिया जाना चाहिए।