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16-Sep-2025 09:30 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही राज्य की सियासत गर्म हो गई है। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारी में जुट गए हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर जनता को आकर्षित करने की रणनीतियां बनाई जा रही हैं। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक अहम कदम उठाने का फैसला किया है। पार्टी ने इस बार टिकट वितरण में युवाओं को प्राथमिकता देने की योजना बनाई है।
बिहार की राजनीति में युवा वर्ग हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता आया है। राज्य की आबादी का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा 40 साल से कम उम्र के लोगों का है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल इस वोट बैंक को नजरअंदाज नहीं कर सकता। राजद ने भी इस आंकड़े को ध्यान में रखते हुए युवाओं को साधने का पूरा खाका तैयार किया है। पार्टी मान रही है कि अगर युवाओं को मौका दिया जाएगा तो न केवल संगठन में नई ऊर्जा आएगी बल्कि जनता के बीच एक ताज़ा और सकारात्मक संदेश भी जाएगा।
राजद की रणनीति के मुताबिक इस बार कई उम्रदराज और पुराने नेताओं का टिकट कट सकता है। पार्टी की अंदरूनी बैठकों में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हो चुकी है। माना जा रहा है कि कई सीटों पर वरिष्ठ नेताओं के स्थान पर नए और युवा चेहरों को उतारा जाएगा। हालांकि, यह भी संभावना जताई जा रही है कि वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव को पूरी तरह नज़रअंदाज नहीं किया जाएगा। ऐसे में उनके परिवार के किसी सदस्य या करीबी को चुनावी मैदान में उतारने का विकल्प खुला रहेगा।
राजद ने पिछले कुछ चुनावों में देखा कि युवाओं की बड़ी संख्या उसके साथ नहीं खड़ी हुई। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजद की पकड़ उतनी मजबूत नहीं दिखी, जबकि अन्य दलों ने इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया। पार्टी को अब एहसास हुआ है कि युवाओं से सीधा संवाद और उन्हें राजनीतिक मंच पर जगह देना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि इस बार टिकट वितरण में युवाओं को तरजीह देने का फैसला लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, राजद केवल विधानसभा टिकट ही नहीं बल्कि पार्टी संगठन में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। कई जिलों में युवा कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारियां देने का निर्णय लिया गया है। यह कदम पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
राजद का यह फैसला एक तरह से विपक्ष पर भी सीधा हमला माना जा रहा है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि जहां अन्य दल केवल पुराने चेहरों पर भरोसा करते हैं, वहीं राजद बदलाव की तरफ कदम बढ़ा रही है। युवाओं को मौका देने की बात कहकर पार्टी राज्य की राजनीति में खुद को अलग और आधुनिक सोच वाला दल साबित करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि यह रणनीति राजद के लिए आसान नहीं होगी। टिकट कटने से नाराज़ वरिष्ठ नेताओं को संभालना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे नेताओं का संगठन और कार्यकर्ताओं पर गहरा असर होता है। अगर वे बगावत करते हैं तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, नए उम्मीदवारों के पास अनुभव की कमी भी हो सकती है, जिसका असर चुनावी मैदान में दिखाई दे सकता है।
राजद की यह नई रणनीति बिहार के चुनावी समीकरण पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर पार्टी युवाओं को टिकट देकर उन्हें जनता से जोड़ने में सफल रही तो यह उसके लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। वहीं, अगर नाराज़गी का मुद्दा बढ़ गया तो पार्टी को अंदरूनी कलह झेलनी पड़ सकती है। कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद ने युवाओं पर बड़ा दांव लगाने का फैसला लिया है। यह दांव कितना सफल होता है, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे, लेकिन इतना तय है कि इस कदम से बिहार की सियासत में नई हलचल जरूर मचेगी।