अरवल में हम पार्टी का सदस्यता अभियान तेज, गरीब चौपाल यात्रा से जनता की समस्याओं को मिलेगा मंच: डॉ. संतोष सुमन रोहतास पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 7 कुख्यात अपराधियों को दबोचा, कई कांडों का किया खुलासा मुजफ्फरपुर कांग्रेस में ‘दो’ जिलाध्यक्ष? आलाकमान की सूची ने बढ़ाया कन्फ्यूजन, चर्चाओं का बाजार गर्म आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की टक्कर से 10 वर्षीय बच्ची की मौत, मामा घायल भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई, अवैध करेंसी के साथ 2 तस्करों को दबोचा पटना में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 128 नशीले इंजेक्शन के साथ 2 गिरफ्तार मुजफ्फरपुर सब्जी मंडी में युवती की गोली मारकर हत्या, प्रेम-प्रसंग में मर्डर की आशंका BIHAR CRIME: अरवल में दिनदहाड़े फायरिंग, इलाके में मचा हड़कंप बरारी में राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता का भव्य स्वागत, विकास के मुद्दों पर हुई अहम चर्चा बिहार सरकार की सख्ती का असर: काम पर लौटे 30 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारी, बाकी 31 के लिए डेडलाइन तय; क्या बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा?
03-Dec-2020 08:35 AM
PATNA: तिहाड़ जेल में बंद सीवान के पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन को को पैरोल मिल गई है. लेकिन यह पैरोल पुलिस कस्टडी की मिली है. वह पुलिस की निगरानी में ही अपनी मां और पत्नी से दिल्ली के किसी भी जगह पर मिल सकते हैं. परिवार के अलावे किसी और से मिलने की अनुमति नहीं दी गई.
दिल्ली हाईकोर्ट से मिली मंजूरी
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को शाहबुद्दीन को दिल्ली में अपने परिवार से मिलने के लिए कस्टडी पैरोल मंजूर कर दी है. हाईकोर्ट ने शाहबुद्दीन को हिदायत दी है. जस्टिस अनूप जे. भंभानी ने बुधवार को हत्या के मामले में सजा काट रहे शाहबुद्दीन को तीन दिन की कस्टडी पैरोल देने का निर्देश दिया है. तीन दिन के भीतर शाहबुद्दीन को दिल्ली में अपनी पसंद का जगह बताने का निर्देश दिया गया है. जहां पर वह मिलना चाहेंगे. मिलने का समय भी निर्धारित किया गया है. वह सिर्फ 6 घंटे ही मुलाकात कर सकते हैं. मुलाकात से पहले उस जगह का सत्यापन भी किया जाएगा. शाहबुद्दीन के पिता का 19 सितंबर को निधन हो गया और वह अपनी बीमार मां के साथ समय बिताना के लिए पैरोल मांगा था.
बिहार पुलिस ने सुरक्षा देने से किया था इनकार
जब शहाबुद्दीन ने कोर्ट से पैरोल मांगी थी तो इस दौरान बिहार पुलिस और दिल्ली पुलिस ने शाहबुद्दीन को सीवान ले जाने पर सुरक्षा मुहैया कराने में असमर्थता जताई थी. दोनों पुलिस के हाथ खड़े करने पर कोर्ट ने बीच का रास्ता निकाला. बता दें कि शहाबुद्दीन हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे है. इनको सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2018 में तिहाड़ जेल भेजा गया था.