Bihar News: महोदय...आप हमारे अंगरक्षक हैं, भाजपा विधायक की यह बात सुनकर विधानसभा में जमकर लगे ठहाके, हंसते हुए अध्यक्ष बोले- अंगरक्षक नहीं संरक्षक बोलिए...

बिहार विधानसभा में भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने विधायक एच्छिक योजना को लेकर सरकार को घेरा। फंड के उपयोग पर पाबंदियों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि विधायक चार करोड़ की राशि रहते हुए भी स्कूलों को बैट-बॉल या पुस्तकालय नहीं दे सकते।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Feb 12, 2026, 12:51:03 PM

Bihar News, Bihar Vidhan Sabha, प्रमोद कुमार, विधायक एच्छिक योजना, बिहार विधानसभा हंगामा, बिजेंद्र प्रसाद यादव, भाजपा विधायक, विधायक फंड, योजना एवं विकास विभाग, Bihar Politics

- फ़ोटो self

Bihar News: हुजूर...आप हमारे अंगरक्षक हैं. यह सुनते ही पूरा सदन ठहाकों से गुंज उठा. दरअसल, बिहार विधानसभा में आज भाजपा विधायक प्रमोद कुमार अपने सवालों से सरकार को घेर लिया. भाजपा विधायक ने कहा कि विधायक चार करोड़ का फंड रखकर टुकुर-टुकुर देखते रह जाता है, बच्चों को एक बैट-बॉल भी नहीं दे पाता. ऐसे में विधायक एच्छिक योजना का क्या फायदा ?

दरअसल, भाजपा विधायक ने आज सदन में कहा कि विधायक चार करोड़ की राशि लेकर आज टुकुर-टुकर देख रहा है. क्यों कि हमलोग अपने हिसाब से फंड नहीं दे पाते. हमलोग किसी स्कूल में जाते हैं, वहां एक पुस्तकाल नहीं बनवा सकते. किसी क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने जाते हैं. लेकिन वहां हम एक बैट-बॉल नहीं दे पाते. क्यों कि विधायक एच्छिक योजना में ऐसा प्रावधान किया गया है कि हमलोग राशि दे नहीं पाते. जबकि एनडीए शासित कई राज्यों में इस तरह की व्यवस्था है कि विधायक अपना फंड कई महत्वपूर्ण विकास योजना व सामाजिक कार्य में दे सकते हैं.

भाजपा विधायक ने बोलने के दौरान कहा कि हुजूर..आप (स्पीकर) हमारे अंगरक्षक हैं. यह सुनकर पूरा सदन ठहाकों से गुंज उठा. फिर खुद को सुधारते हुए कहा कि अंगरक्षक नहीं हुजूर, संरक्षक हैं. स्पीकर ने भी हंसते हुए कहा कि संरक्षक कहिए.इस पर विधायक ने गलती सुधारते हुए कहा कि हां हुजूर..बोलने में गलती हो गई.

मामला योजना एवं विकास विभाग से जुड़ा था, लिहाजा मंत्री बिजेन्द्र प्रयाद यादव ने कहा कि इनका प्रस्ताव अभी सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. ये जब मंत्री रहते हैं तो चुप रहते हैं, मंत्री नहीं रहते हैं तो इधर-उधर का सवाल उठाते रहते हैं. फिर आप हमें दूसरे राज्यों की नीति का प्रमाण दें, सरकार उस पर विचार करेगी.