NSMCH बिहटा कॉलेज स्थित बालाजी चारधाम मंदिर में वार्षिकोत्सव, भंडारा और भव्य महापूजन पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर चिराग पासवान की प्रतिक्रिया, कहा..बिना आधार नहीं होती कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर बेऊर जेल से PMCH लाए गए पप्पू यादव, निजी सचिव ने कहा..वार्ड में शिफ्ट करने के बजाय आधे घंटे तक कॉरिडोर में रखा गया बिहार में सरकारी मास्टर को सिर मुंडवाकर पूरे बाजार में घुमाया, छात्रा से रेप की कोशिश में गिरफ्तार बिहार में 200 से अधिक प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवनों का निर्माण शुरू, गुणवत्ता पर विशेष जोर सहरसा में लौंडा-नाच करने वाले 4 दोस्तों ने खा लिया कीटनाशक, 3 की मौत Bihar Crime News: मामूली विवाद को लेकर युवक की पीट-पीटकर ले ली जान, हत्या की वारदात से सनसनी Bihar Crime News: शराबबंदी वाले राज्य में 70 लाख की शराब जब्त, ट्रक से बिहार पहुंची थी बड़ी खेप; दो तस्कर गिरफ्तार Bihar Crime News: शराबबंदी वाले राज्य में 70 लाख की शराब जब्त, ट्रक से बिहार पहुंची थी बड़ी खेप; दो तस्कर गिरफ्तार Bihar News: ढाका विधानसभा सीट पर फिर होंगे चुनाव ? पवन जायसवाल ने पटना हाईकोर्ट में किया है केस, 10 तारीख को RO को न्यायालय में 'शपथ' देने का आदेश
15-Aug-2021 06:49 PM
DELHI : संसद में लगातार हो रहे हंगामे और हंगामे के बीच पास किए जा रहे कानूनों को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने चिंता जताई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने कहा है कि संसद में गुणवत्तापूर्ण बहुत की कमी है ऐसे में जो कानून पास होते हैं उनके पीछे की मंशा का पता लगाना मुश्किल होता है। संसद की वर्तमान स्थिति को उन्होंने खेदजनक कहा है। दरअसल आज सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद सीजेआई ने यह बातें कहीं हैं।
सीजेआई एनवी रमना ने कहा है कि संसद में कानून पास करते वक्त उचित बहस की कमी दिखती है। कानूनों पर बहस ना होने की वजह से कोर्ट तक आने वाले मामले बढ़ते हैं। बिना बहस के किसी भी नए कानून की थाह नहीं ली जा सकती। इसका इरादा क्या है और कानून की विषयवस्तु का पता नहीं चल पाता है।
चीफ जस्टिस ने कहा है कि पहले अलग-अलग कानूनों पर चर्चा होती थी। जिससे उनके बारे में जानकारी भी व्यापक मिलती थी। इस वजह से कोर्ट के लिए भी कानूनों को लागू करवाना आएंगे समझना आसान हो जाता था। चीफ जस्टिस ने कहा कि आजादी के बाद शुरुआती सालों में संसद में मौजूद सांसदों और स्वतंत्रता सेनानियों में से ज्यादातर वकील होते थे। इस वजह से भी संसद में अच्छी बहस होती थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि उनका मानना है कि वकील बिरादरी को अब इसके लिए आगे आना चाहिए।