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संपत्ति बंटवारे को लेकर श्मशान घाट पर लड़ने लगी तीन बहने, 9 घंटे चिता पर पड़ी रही मां की लाश, आगे क्या हुआ जानिए?

15-Jan-2024 08:38 PM

By First Bihar

DESK: किसी ने ठीक ही कहा है कि बाप बड़ा ना भईया सबसे बड़ा रूपैया.. यह कहावत मथुरा के श्मसान घाट पर चरितार्थ होता नजर आया। जहां मां की मौत के बाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर तीन बेटियां श्मशान घाट पर ही लड़ने लगी। जिसके कारण घंटों लाश चिता पर पड़ा रहा। 


लोग तीनों बहनों को समझाते रहे लेकिन कोई समझने को तैयार नहीं थी। जब तक मामले का निपटारा नहीं हो गया तब तक शव को मुखाग्नि नहीं दी जा सकी। करीब 9 घंटे बाद स्टाम्प पेपर पर लिखित बंटवारा हुआ तब ही शव का दाह संस्कार करने दिया गया। श्मशान घाट पर लड़ती मृतका के तीनों बेटियों की चर्चा इलाके में होने लगी है। 


रिश्ते को शर्मसार करने वाला यह मामला मथुरा के मसानी श्मशान घाट का है। जहां मौत के बाद 85 वर्षीय पुष्पा की लाश को अंतिम संस्कार के लिए लाया गया था। लेकिन दाह संस्कार की बात छोड़ पुष्पा देवी की तीनों बेटियां श्मशान घाट पर ही आपस में लड़ने लगी। लड़ाई का कारण जमीन का विवाद था। तीनों बेटियों को लोगों ने समझाने की खूब कोशिश की लेकिन तीनों कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुई। 


8 घंटे तक तीनों के बीच लड़ाई होती रही जिसके कारण शव का दाह संस्कार भी घंटों रुका रहा। अंतिम संस्कार कराने आए पंडित भी श्मशान से चले गये। करीब 9 घंटे तक श्मशान घाट पर तीनों बेटियों का ड्रामा चलता रहा। तीनों को झगड़ता देख अंतिम यात्रा में आए लोग भी हैरान और परेशान हो गये। लेकिन तीनों बहने जमीन के बंटवारे की जिद्द पर अड़ी थी। श्मशान घाट में स्टाम्प पेपर लाया गया फिर लिखित बंटवारा होने के बाद ही तीनों बहनों ने मां का दाह संस्कार किया।


बताया जाता है कि मृतका पुष्पा देवी की सिर्फ तीन बेटियां हैं एक भी बेटा नहीं है। मां की संपत्ति के बंटवारे को लेकर तीनों बेटियों के बीच पहले से ही लड़ाई चल रहा था। मां की मौत के बाद तीनों बेटियां श्मशान घाट पर पहुंच गयी और वहां भी आपस में झगड़ने लगी। बेटियों का कहना था कि जब तक मां की संपत्ति का बंटवारा नहीं होगा तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं होगा। 


श्मशान घाट पर तीनों बहनों के आपस में झगड़ने की सूचना किसी ने पुलिस को दे दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने भी तीनों बहनों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे समझने को तैयार नहीं थी। तीनों का कहना था कि जब तक संपत्ति का बंटवारा नहीं होगा वो मां की लाश का दाह संस्कार नहीं करेगी। मामला सुलझाते-सुलझाते शाम हो गया। श्मशान घाट पर स्टाम्प पेपर मंगवाया गया जिसमें लिखा गया कि मृतका की बची हुई संपत्ति को शशि और सुनीता के नाम किया जाएगा। जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया।