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‘पुस्तकें भलें ही जल जाएं ; लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती’ ; PM मोदी बोले- नालंदा विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देगा

19-Jun-2024 12:13 PM

By First Bihar

NALANDA : तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद बुधवार को बिहार पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के नवनिर्मित कैंपस का उद्घाटन किया। कैंपस के उद्घाटन के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पुस्तकें भले ही जल जाएं, लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती हैं। नालंदा का कैंपस विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देने के लिए काफी है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि तीसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण के 10 दिन के भीतर ही मुझे नालंदा आने का अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्य तो है ही, मैं इसे भारत की विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में देखता हूं। नालंदा केवल नाम नहीं है बल्कि नालंदा एक पहचान है, नालंदा एक सम्मान है, नालंदा मूल्य है, नालंदा मंत्र है, गौरव है ,गाथा है। नालंदा सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले ही जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती।


पीएम मोदी ने कहा कि नालंदा के दंश ने भारत को अंधकार से भर दिया था। अब इसकी पुनर्स्थापना भारत के स्वर्णिम युग की शुरुआत करने जा रहा है। अपने प्राचीन अवशेषों के समीप नालंदा का नवजागरण, यह नया कैंपस विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देगा। नालंदा बताएगा, जो राष्ट्र मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं, वह राष्ट्र इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं।


प्रधानमंत्री ने कहा कि नालंदा केवल भारत के ही पुनर्जागरण का अतीत नहीं है बल्कि इसमें विश्व के और एशिया के कितने ही देशों की विरासत जुड़ी हुई है। एक विश्वविद्यालय के कैंपस के उद्घाटन में इतने देशों का उपस्थित होना, यह अपने आप में अभूतपूर्व है। नालंदा विश्वविद्याल के पुनर्निर्माण में हमारे साथी देशों की भागीदारी भी रही है। मैं भारत के सभी मित्र देशों का अभिनंदन करता हूं।


उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को भी तहे दिल से बधाई देता हूं। बिहार अपने गौरव को वापस लाने के लिए जिस तरह विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, नालंदा का यह कैंपस उसी की एक प्रेरणा है। नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था। नालंदा का अर्थ बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जहां शिक्षा का, ज्ञान के दान का अविरल प्रवाह हो। शिक्षा को लेकर भारत की यही सोच रही है।