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Bihar Bhumi Survey: बिहार में 'भूमि सर्वे' को लेकर तय हुई समय सीमा, सरकार का ऐलान- अब नहीं चलेगी ढिलाई

Bihar Bhumi Survey News: बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण को लेकर सरकार ने नई समय-सीमा तय कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि अगले दो वर्षों में हर हाल में भूमि सर्वे पूरा किया जाएगा।

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Viveka Nand
4 मिनट

Bihar Bhumi Survey: बिहार में भूमि सर्वेक्षण को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. सरकार ने भूमि सर्वे को लेकर एक बार फिर से समय तय किया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से बताया गया है कि अगले दो सालों में हर हाल में विशेष भूमि सर्वेक्षण का कार्य पूरा होगा. 

उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा वर्ष 2011 में घोषित बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण को आगामी दो वर्षों में पूर्ण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक जिले में तय समय-सीमा के अनुसार कार्य का विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सर्वे कार्य पूर्ण पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ संपन्न हो, ताकि आम जनता को इसका वास्तविक लाभ शीघ्र मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सर्वे का उद्देश्य केवल इसे पूरा करना नहीं, बल्कि आम लोगों की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की गलती की शिकायत पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जहां भी त्रुटि या अनावश्यक विलंब पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्री ने दो टूक कहा कि सर्वे औपचारिकता नहीं, बल्कि सुधार का आधार बने। गलत रिपोर्टिंग या मनमानी की स्थिति में कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की जानकारी लिखित रूप में विभाग को दें। इसपर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव सी.के. अनिल और सचिव जय सिंह ने वर्षों पूर्व हुए कैडेस्ट्रल एवं रिवीजनल सर्वे की जानकारी देते हुए नए सर्वे से होने वाले लाभों पर प्रकाश डाला।भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने सर्वे की वर्तमान स्थिति और विलंब के कारणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तकनीकी मार्गदर्शिका का समय पर निर्माण न होने से प्रारंभिक चरण में कार्य प्रभावित हुआ। यह मार्गदर्शिका मार्च 2019 में अधिसूचित हुई। प्रथम चरण के 20 जिलों के 89 अंचलों में विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की समय पर नियुक्ति नहीं होने से दिसंबर 2021 में शुरू कार्य को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। बाद में शेष अंचलों तथा 18 जिलों के सभी अंचलों में सर्वे कार्य सितंबर 2024 से प्रारंभ किया गया। फील्ड में राजस्व संबंधी जटिलताओं के समाधान हेतु दिसंबर 2024 में 16 बिंदुओं पर विभागीय मार्गदर्शन भी अधिसूचित किया गया।

प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों के 5657 राजस्व ग्रामों में ऑथोफोटोग्राफ, ग्रामस्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। किस्तवार कार्य 99.92 प्रतिशत, खानापुरी 94.4 प्रतिशत तथा प्रपत्र-6 का कार्य लगभग 79 प्रतिशत ग्रामों में पूर्ण है। 67 प्रतिशत ग्रामों में प्रारूप अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि 31 प्रतिशत ग्रामों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से 912 ग्रामों के अभिलेखों को अधिसूचित भी किया जा चुका है।

द्वितीय चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों के 37,419 राजस्व ग्रामों में हवाई सर्वेक्षण, ऑथोफोटोग्राफ, ग्रामस्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य पूरा कर लिया गया है। रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं। लगभग 98.81 प्रतिशत ग्रामों में प्रपत्र-5 का कार्य पूर्ण हो चुका है। साथ ही त्रि-सीमाना निर्धारण और ग्राम सीमा सत्यापन का कार्य भी प्रगति पर है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता

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