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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया पर अहम सुनवाई, 32 साल बाद वकील के रूप में दिखेंगी सीएम ममता बनर्जी

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी 32 साल बाद वकील के रूप में पेश होंगी, पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पर सुनवाई, वोटर लिस्ट सुधार को लेकर TMC की याचिका पर विचार।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में आज बुधवार को पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुनवाई शुरू हो रही है और सभी की निगाहें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर टिकी हैं। करीब 3 दशक बाद ममता किसी केस में खुद पैरवी करती नजर आएंगी। 32 साल पहले लड़े गए अपने पिछले केस में उन्हें जीत हासिल हुई थी।


SIR प्रक्रिया पर ममता का विरोध

अपनी फायरब्रांड छवि रखने वाली ममता बनर्जी वोटर लिस्ट को लेकर जारी SIR प्रक्रिया के खिलाफ लगातार मुखर रही हैं। उन्होंने पहले बिहार में लागू SIR प्रक्रिया पर विरोध जताया था और अब अपने राज्य में इस सुधार प्रक्रिया के खिलाफ लगातार बागी तेवर अपनाए हुए हैं। ममता और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी। इसमें ममता बनर्जी, मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन की ओर से दाखिल याचिकाओं समेत अन्य याचिकाओं पर विचार किया जाएगा।


ममता बनर्जी की वकालत की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी कोर्ट में मौजूद रह सकती हैं। उनके पास LLB की डिग्री है और वह अपनी दलीलें खुद भी पेश कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो 32 साल बाद वह किसी केस में वकील के रूप में पेश होंगी। उन्होंने आखिरी बार 10 फरवरी, 1994 को पश्चिम बंगाल की जिला अदालत में वकील के रूप में केस लड़ा था और 33 आरोपियों को जमानत दिलाई थी। ममता ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की और राजनीति में आने से पहले कुछ साल तक वकालत की प्रैक्टिस की।


SIR प्रक्रिया और लॉजिकल विसंगतियां

पिछले महीने 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि राज्य में SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग को ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में “लॉजिकल विसंगतियों” की लिस्ट प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया था।


2002 की वोटर लिस्ट के अनुसार, वंश लिंकिंग में माता-पिता के नाम में बेमेल और उम्र के अंतर के कारण लगभग 1.25 करोड़ वोटर्स “लॉजिकल विसंगतियों” की सूची में शामिल हैं। ममता ने 28 जनवरी को याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता