सहरसा कोर्ट का अनोखा फैसला: फर्जी दस्तावेज मामले में आरोपी को मिली जमानत, 6 महीने मंदिर में सेवा की शर्त महाशिवरात्रि और होली से पूर्व हाई अलर्ट: डीजे पर रोक शराबबंदी पर सख्ती बिहार में सिलेंडर हादसा: भांजे की छठ्ठी में मधुबनी में मामा झुलसा, गयाजी में धमाके से 3 घर जलकर राख मोतिहारी में सूखा नशा के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, स्मैक-गांजा के साथ महिला गिरफ्तार होली को लेकर एक्शन में पुलिस, सिविल ड्रेस में शराब तस्करों के ठिकानों पर कर रही रेड, जमुई में बाप-बेटे को दबोचा बिहार में अपराधियों का तांडव: समस्तीपुर में ज्वेलरी शॉप में करोड़ों की लूट, फायरिंग करते फरार हुए अपराधी प्रेमचंद रंगशाला में ‘सरगम’ की गूंज: श्रैफिकुलम विद्या बोधि स्कूल का भव्य वार्षिक समारोह Bihar Crime News: बिहार में दिनदहाड़े 10 लाख के ज्वेलरी की चोरी, बदमाशों ने बाइक की डिक्की से उड़ाए गहने Bihar Crime News: बिहार में दिनदहाड़े 10 लाख के ज्वेलरी की चोरी, बदमाशों ने बाइक की डिक्की से उड़ाए गहने ‘प्रेग्नेंट करो और पैसे कमाओ’, बिहार में साइबर अपराधियों का हैरान करने वाला ऑफर; युवकों को भेजते थे हॉट महिलाओं की तस्वीर
02-Aug-2023 12:35 PM
By VISHWAJIT ANAND
PATNA: जस्टिस फोर लोहार का बैनर पोस्टर और हथौड़ी हाथ में लिये लोहार जाति के लोगों ने आज जमकर प्रदर्शन किया। पटना के सचिवालय हॉल्ट पर ट्रेन को रोकने की कोशिश की। इस दौरान रेल प्रशासन ने लोगों को आगे बढ़ने से रोका। आंदोलनकारियों ने इस दौरान लालू-नीतीश-तेजस्वी के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि LOHARA कोई जाति नहीं है। इसका हिन्दी लोहार किया जाए और इस जाति को एसटी में शामिल किया जाए।
लोहार जाति के लोगों का कहना है कि 1950 से एसटी अनुसूचित जाति में आती हैं। भारत सरकार जनजातीय मंत्रालय हमारी सूचना को रोके रखी है। हमलोग चंदा करके हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़े। 13 बार लोकसभा से लेकर विधानसभा में हमारी आवाज उठी लेकिन सरकार हमारी मांगे नहीं सुन रही है। इनका कहना है कि संविधान अंग्रेजी में बना था और लोहार को अंग्रेजी मे लोहारा लिखा गया था। जबकि इसका हिन्दी लोहार होगा।
सरकार ने लोहार को लोहारा लिखकर आरक्षण से वंचित कर दिया है। सरकार से ये मांग कर रहे हैं लोहारा कोई जाति नहीं है इसलिए इसे लोहार लिखा जाए। इसकी अधिसूचना जारी की जाए। इस मांग को लेकर लोहार जाति के लोग लगातार आंदोलन कर रहे है लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। मजबुरन आज उन्हें रेलवे के परिचालन को रोकने के लिए उतरना पड़ा है। यदि उनकी मांगे नहीं मानी गयी तो आंदोलन और तेज होगा।