BIHAR NEWS: बिहार की बेटी ने किया कमाल: BSF में चयनित होकर बदली सामाजिक सोंच, 3 पीढ़ियों तक नहीं थी सरकारी नौकरी

बिहार के वैशाली जिले के मोहीउद्दीनपुर गांव की बेटी खुशी कुमारी ने अपनी मेहनत और हौसले से न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे पंचायत की पहली सरकारी नौकरी पाने वाली लड़की बनकर इतिहास रच दिया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 13 Feb 2026 05:00:33 PM IST

BIHAR NEWS: बिहार की बेटी ने किया कमाल: BSF में चयनित होकर बदली सामाजिक सोंच, 3 पीढ़ियों तक नहीं थी सरकारी नौकरी

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BIHAR NEWS: बिहार के वैशाली जिले के मोहीउद्दीनपुर गांव की बेटी खुशी कुमारी ने अपनी मेहनत और हौसले से न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे पंचायत की पहली सरकारी नौकरी पाने वाली लड़की बनकर इतिहास रच दिया है। खुशी ने बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) में चयनित होकर अपने खानदान का तीन पीढ़ियों का सूखा खत्म किया और ग्रामीण समाज में फैली रूढ़िवादिता को चुनौती दी।


संघर्षों से भरा सफर

खुशी का जीवन आसान नहीं था। चार बहनों और एक भाई के परिवार में आर्थिक तंगी हमेशा चुनौती बनी रही। पिता लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और मां की तबीयत भी अक्सर ठीक नहीं रहती थी। घर की जिम्मेदारियां, माता-पिता के इलाज का खर्च और सीमित संसाधनों के बावजूद खुशी ने हिम्मत नहीं हारी।


तानों को बनाया प्रेरणा का हथियार

ग्रामीण परिवेश में बेटियों की पढ़ाई को अक्सर बोझ माना जाता है। खुशी को भी कई बार ताने सुनने पड़े, लेकिन खुशी ने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। सुबह-शाम खेतों की पगडंडियों पर दौड़ लगाना और रात में लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन गई।


खुद पर था भरोसा

BSF में चयन की खबर जैसे ही मोहीउद्दीनपुर पहुंची, पूरे इलाके में खुशी का माहौल देखा गया। खुशी कुमारी ने कहा, मेरा सपना बचपन से ही देश सेवा का था। हालात मुश्किल थे, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था। मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हूं, जिन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया।


सामाजिक रूढ़ियों पर जीत

खुशी की मां, ममता देवी, कहती हैं, कि लोग कहते थे कि लड़की क्या ही कर लेगी पढ़-लिख कर? आज मेरी बेटी ने सबका मुंह बंद कर दिया है। वह सिर्फ मेरी बेटी नहीं, पूरे गांव का गौरव है। खुशी की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

आज खुशी कुमारी वैशाली की हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। उनकी मेहनत और सफलता ने यह दिखा दिया कि सामाजिक तानों और रूढ़िवादिता के बावजूद अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता हासिल की जा सकती है।