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17-Jan-2020 01:35 PM
PATNA: पटना हाईकोर्ट ने नीतीश कुमार के बहुप्रचारित मानव श्रृंखला के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया. हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मानव श्रृंखला में भाग नहीं लेने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी.
पटना हाईकोर्ट में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार बच्चों से लेकर शिक्षकों को जबरन मानव श्रृंखला में शामिल कराने का फरमान जारी कर रही है. रविवार को स्कूल खोल दिये गये हैं. बच्चों और शिक्षकों को हर हाल में मानव श्रृंखला में खड़े होने का आदेश दिया गया है.
कोर्ट में हुई सुनवाई की जानकारी देते हुए राज्य के महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका में लगाये गये आरोपों को सही नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि मानव श्रृंखला में लोग स्वेच्छा से शामिल हो सकते हैं. राज्य सरकार किसी को बाध्य नहीं करेगी और इसमें शामिल नहीं होने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जायेगी. महाधिवक्ता के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि ये किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है बल्कि सरकार की पहल है. इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जा सकता.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नीतीश कुमार को बड़ी राहत मिली है. दरअसल मानव श्रृंखला के जरिये वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का नीतीश का सपना पूरी तरह से सरकारी स्कूलों पर टिका है. सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को मानव श्रृंखला में खड़ा करने की तैयारी पूरी कर ली है. भले ही कागजों में ये नहीं कहा जा रहा है कि स्कूली बच्चों और शिक्षकों को मानव श्रृंखला में हर हाल में शामिल होना है लेकिन ये मैसेज जुबानी तौर पर सारे स्कूलों में पहुंचा दिया गया है. राज्य भर के डीएम प्राइवेट स्कूलों की मीटिंग कर उन्हें भी मानव श्रृंखला में शामिल होने का मौखिक फरमान सुना चुके हैं. ऐसे में अगर कोर्ट ने मानव श्रृंखला के दिन स्कूलों को खोलने पर रोक लगा दिया होता तो नीतीश कुमार की भद्द पिटनी तय थी.