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28-Nov-2022 07:02 AM
DESK: बिहार में शराब को लेकर यू टर्न मारने वाले नीतीश कमार ने शनिवार को पटना में मंच पर पुलिस के अधिकारियों को बुलाकर कसम खिलायी थी कि वे शराब के धंधेबाजों को पकड़ेंगे. एक दिन बाद का नतीजा देखिये. बिहार में शराब तस्करी के कई संगीन मामलों का आरोपी बड़े आराम से चुनाव में खड़ा हुआ और बेरोकटोक चुनाव जीत भी गया. बिहार पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कोई कोशिश तक नहीं की. चर्चा ये है कि वह हरिय़ाणा के एक ऐसे नेता का खास है जिनसे नीतीश कुमार के बेहद मधुर संबंध जगजाहिर हैं.
रविवार को हरियाणा में जिला परिषद के चुनाव परिणाम आये जिसमें बिहार में शराब की तस्करी का आरोपी जीवन हितैषी उर्फ लाला भांड ने जीत हासिल कर ली. लाल भांड बिहार में शराब तस्करी के गंभीर मामलों का आऱोपी है. वह बिहार पुलिस की कस्टडी से फरार हो चुका है. उसने जब जिला परिषद चुनाव के लिए नामांकन किया था तब से ही पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ था. लेकिन पूरे चुनाव के दौरान बिहार की पुलिस उसकी ओर झांकने तक नहीं आयी.
बता दें कि बिहार में शराब तस्करी के मामले में इसी साल बिहार से गयी पुलिस की टीम ने 15 अक्टूबर को लाल भांड को गिरफ्तार किया था. रिवाडी के कसोली थाना क्षेत्र से गिऱफ्तार किये गये लाला भांड को कसोली थाना ले जाया गया था. लेकिन वह कोसली थाना परिसर से पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था. बिहार पुलिस लाला भांड को गुडियानी रोड से गिरफ्तार कर कोसली थाने में लेकर आई थी, लेकिन वह थाने से फरार हो गया था. इसके बाद बिहार पुलिस के एसआई कृष्ण मुरारी ने कोसली थाने में उसके खिलाफ अदालत के आदेशों की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और पुलिस कस्टडी से फरार होने का मुकदमा दर्ज कराया था.
हैरानी की बात ये थी कि उसी लाला भांड ने कुछ ही दिन बाद जिला परिषद के चुनाव में नामांकन कर दिया. नामांकन करने के बाद वह चर्चे में आया. सवाल ये उठा कि पुलिस कस्टडी से फरार आरोपी ने पुलिस की मौजूदगी में कैसे नामांकन दाखिल कर गया. लेकिन बाद में सारी हकीकत सामने आयी. बिहार में शराब तस्करी के बड़े मामले के आरोपी और पुलिस हिरासत से भागने वाले लाला भांड ने कोर्ट से अपने बचने का सारा बंदोबस्त कर लिया था और बिहार की पुलिस और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रही.
दरअसल नामांकन करने से रहले जीवन हितैषी उर्फ लाला भांड ने कोर्ट में याचिका दर्ज कर जिला परिषद में के वार्ड नंबर-तीन से नामांकन जमा करने की अनुमति मांगी थी. कोर्ट ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने की शर्त पर नामांकन भरने की अनुमति दी थी. नामांकन के अगले दिन जीवन हितैषी उर्फ लाला भांड ने कोसली कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. उसके खिलाफ हरिय़ाणा में बिहार पुलिस की कस्टडी से भागने का केस दर्ज था. बिहार पुलिस की ओर से कोर्ट में कोई विरोध नहीं किया गया लिहाजा लाला भांड को उस केस अदालत से जमानत मिल गई.
शराब तस्करी के मामले में बिहार पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
बता दें कि बिहार पुलिस ने हरिय़ाणा के जीवन हितैषी उर्फ लाला भांड के खिलाफ 2017 में ही शराब तस्करी का मुकदमा दर्ज किया था. जीवन हितैषी उर्फ लाला पर सात मामले दर्ज हैं. बिहार के गोपालगंज की कुचायकोट थाना पुलिस ने 26 अगस्त 2017 को ही शराब तस्करी के आरोप में जीवन हितैषी उर्फ लाला पर मुकदमा दर्ज किया था. लाला भांड को बिहार में शराब भेजने वाले सबसे बड़े तस्करों में से एक बताया गया था. बिहार की पुलिस ने करीब डेढ महीने पहले उसे हरियाणा से गिरफ्तार भी किया था लेकिन वह कथित तौर पर फरार हो गया था. उसके फरार होने की एफआईआर हरियाणा में दर्ज करायी गयी थी जिसमें उसने बेल ले लिया.
एक खास नेता का है करीबी
जिला परिषद के पूरे चनाव के दौरान वह घूम घूम कर प्रचार करता रहा औऱ बिहार पुलिस ने अपने यहां दर्ज शराब तस्करी के मामले में उसे फिर से गिरफ्तार करने की कोई कोशिश नहीं की. लिहाजा वह बड़े आराम से चुनाव लड़ कर जीत गया. स्थानीय लोग बताते हैं कि बिहार में शराब तस्करी का आरोपी जीवन हितैषी उर्फ लाला भांड हरियाणा के एक बड़े नेता का खास माना जाता है. उस नेता के बेहद नजदीकी संबंध में बिहार की सत्ता में बैठे लोगों से हैं. सवाल ये उठ रहा है कि क्या लाला भाड़ को इसका फायदा मिला.