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26-May-2023 04:51 PM
By VISHWAJIT ANAND
PATNA: 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करने वाले हैं लेकिन इससे पहले उद्घाटन को लेकर देश में सियासी संग्राम छिड़ गया है। देशभर के 21 राजनीतिक दलों ने उद्घाटन का बहिष्कार कर दिया है और समारोह में शामिल नहीं होने का एलान कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने कहा है कि वह एक आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके खिलाफ अनशन करेगी।
दरअसल, कांग्रेस, जेडीयू और आरजेडी समेत विपक्ष के 21 दलों ने उद्घाटन समारोह से दूरी बना ली है। उनका कहना है कि नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री से नहीं कराकर राष्ट्रपति से कराया जाए। जेडीयू ने कहा है कि नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को नहीं बुलाना दलित, आदिवासी समाज के साथ साथ महिलाओं का अपमान है और जेडीयू इस अपामान को बर्दाश्त नहीं करेगी। बिहार जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा है कि इसके खिलाफ जेडीयू के नेता और कार्यकर्ता 28 मई को बाबा साहब की प्रतिमा के नीचे बैठकर अनशन करेंगे।
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति संसदीय प्रणाली के अहम अंग होते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव सिर्फ बीजेपी के वोट से नहीं हुआ है बल्कि सभी दलों के लोगों ने उनके समर्थन में वोट किया था। राष्ट्रपति किसी एक दल के नहीं होते हैं। बीजेपी संसदीय प्रणाली को खत्म करने की कोशिश कर रही है। आज जिस तरह से इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही है, वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से नहीं कराकर प्रधानमंत्री से कराना कहीं से भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश बाबा साहब के सिद्धांतों से चलेगा न कि नरेंद्र मोदी के संविधान से चलेगा। ऐसा काम करने वालों को देश की जनता संविधान से ही मिटा देगी। जेडीयू इसके खिलाफ 28 मई को पटना हाईकोर्ट के पास स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा के समक्ष अनशन करेगी और इसके माध्यम से विरोध जताएगी। अनशन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह समेत तमाम पदाधिकारी और नेता मौजूद रहेंगे।