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16-Dec-2020 07:54 AM
BHAGALPUR: शिक्षा मंत्री के पद ग्रहण करने के तीन घंटे के अंदर इस्तीफा देने वाले मेवालाल चौधरी को कोर्ट में हाजिर होना था, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए. यही नहीं उनका वकील भी कोर्ट में पेश नहीं हुए. इसका कोई खास कारण भी नहीं बताया गया.
नियुक्ति घोटाले में सुनवाई
बिहार कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली और भवन निर्माण में हुई घोटाले को लेकर पूर्व कुलपति मेवालाल चौधरी मंगलवार को विजिलेंस कोर्ट में तारीख पर आना था, लेकिन वह नहीं जाए. यही नहीं इसका कोई कारण भी नहीं बताया गया है. जिसके बाद कोर्ट ने विजिलेंस जज शोभाकांत मिश्रा ने अगली तारीख एक फरवरी तय की है.
चार्जशीट जमा नहीं
बताया जा रहा है कि अब तक इस मामले में चार्जशीट जमा नहीं की गई है. राजभवन के निर्देश के बाद सबौर थाने में 2017 में केस दर्ज किया गया था. जिसमें मेवालाल मुख्य आरोपी हैं. जिसके बाद मेवालाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए भागलपुर कोर्ट से जमानत मांगी, लेकिन कोर्ट ने रद्द कर दिया. उसके बाद वह मार्च 2017 में हाईकोर्ट पहुंचे यहां उनको जमानत मिल गई, लेकिन साथ हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा जोड़ी गई. इसके बाद केस निगरानी की विशेष अदालत में चला गया.
मेवालाल पर घोटाला का आरोप
नीतीश कुमार ने बिहार के बड़े नौकरी घोटाले के आरोपी को अपना शिक्षा मंत्री बनाया था. मेवालाल चौधरी पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहते नौकरी में भारी घोटाला करने का आरोप है. उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद ने बिहार का राज्यपाल रहते मेवालाल चौधरी के खिलाफ जांच करायी थी और उन पर लगे आरोपों को सच पाया था. ये जांच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर हुई थी. मेवालाल चौधरी पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में भी घोटाले का आरोप है.