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कैमूर में 25 और 26 फरवरी को किसान महापंचायत, एक मंच पर नजर आएंगे सुधाकर सिंह और राकेश टिकैत

16-Feb-2023 08:07 AM

By First Bihar

KAMIUR: बिहार सरकार और नीतीश कुमार के खिलाफ लगातार किसानों की बातों को लेकर हमलावर रहने वाले पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह और किसान नेता के नाम से पहचान बनाने वाले राकेश  टिकैत जल्द ही एक मंच पर नजर आने वाले हैं। ये दोनों इसी महीने बिहार के कैमूर में एक साथ नजर आने वाले हैं। इनके आगमन को लेकर जोर- शोर से तैयारी की जा रही है। 


मिली जानकारी के मुताबिक, इस महीने के  25 और 26 फरवरी को कैमूर में किसान महापंचायत बुलाई गई है। इसमें सुधाकर सिंह और राकेश टिकैत शिरकत करेंगे। 25 फरवरी को चांद और 26 को भभुआ में महापंचायत का आयोजन किया गया है। इसमें एक्सप्रेस-वे के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण की एवज में किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिए जाने पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। इस  महापंचायत में राकेश टिकैत के शामिल होने का न्योता खुद सुधाकर सिंह ने ही दिया है। 


वहीं, इस दो दिवसीय किसान महापंचायत को लेकर आरजेडी विधायक सुधाकर सिंह ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वे गांव-गांव जाकर किसानों से महापंचायत में जुटने का आह्वान कर रहे हैं। सुधाकर सिंह ने कहा है कि, एक्सप्रेस-वे निर्माण में अधिग्रहित की जा रही किसानों की जमीन का सरकार उचित मुआवजा नहीं दे रही है। 2013 में बने कानून के मुताबिक अधिग्रहित भूमि का किसानों को बाजार भाव से चार गुना ज्यादा मूल्य दिया जाना चाहिए। मगर 2017 में इस कानून में संशोधन करके यह रेट सरकारी दर से चार गुना मूल्य कर दिया गया। उन्होंने पुराने नियम के आधार पर ही जमीन का मुआवजा देने की मांग की।


पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने किसानों को 5-5 गांवों के लोगों की कमेटी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैसे ही एक्सप्रेस-वे का काम शुरू होगा, वहां ये कमेटियां बारी-बारी से तीन-तीन दिन धरना देगी। इन्हीं सब बातों को लेकर किसानों के समर्थन में 25 फरवरी को चांद और 26 फरवरी को भभुआ में आयोजित विशाल महापंचायत आयोजित की जा रही है। इसमें किसान नेता राकेश टिकैत भी हिस्सा लेंगे और किसानों को संबोधित करेंगे।


आपको बताते चलें कि, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि एक्सप्रेस-वे बनने से किसानों को कोई लाभ नहीं है। इससे केवल अडानी और अंबानी को फायदा पहुंचने वाला है,क्योंकि इस सड़क से बड़े व्यापारियों के सामान की ढुलाई होगी। इससे किसानों के बीज, खाद की ढुलाई नहीं होगी।